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उत्तराखंड के शिक्षा विभाग पर नेताजी का 'कब्जा'

Sun, 31 Aug 2014 10:09 AM IST
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में नियमावली संशोधन के नाम पर तबादलों पर रोक लगी हुई है। अटैचमेंट भी समाप्त किए जा चुके हैं। लेकिन ये दोनों रोक सिर्फ आम शिक्षकों के लिए हैं।
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खास के लिए कोई नियम नहीं है। मंत्रियों के रिश्तेदारों, परिजनों के आगे शिक्षा विभाग के कायदे काफूर हो जाते हैं। चाहे कोई आम शिक्षक कितना ही परेशान हो उसकी शिक्षा विभाग में कोई सुनने वाला नहीं है।

नेताजी के इशारे पर इन शिक्षकों को मनचाहा तबादला दिया जाता है और अटैचमेंट को नियमविरुद्ध बढ़ाया जाता है। दूसरी ओर, बीमारी से परेशान और वर्षों से दुर्गम स्कूलों में तैनात शिक्षकों को नियमों का पाठ पढ़ाकर वनवास झेलने पर मजबूर किया जाता है।
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इनके लिए कोई नियम नहीं...

शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी के रिश्तेदार सुरेंद्र डंगवाल डायट देहरादून में अटैच थे। उनकी मूल तैनाती जीआईसी थत्यूड़ टिहरी में भौतिक विज्ञान के प्रवक्ता के पद पर थी।

इनके अटैचमेंट का मामला सामने आया तो विभाग के निदेशक ने तुरंत निरस्त करने की बात कही, लेकिन मंत्री के रिश्तेदार पर हाथ कौन डाले?

अटैचमेंट तो निरस्त नहीं हुआ। सवाल खत्म करने के लिए सुरेंद्र को डायट में ही स्थानांतरित जरूर कर दिया गया। सुरेंद्र ने 21 मई 2014 को डायट में कार्यभार ग्रहण कर लिया।

प्रदेश में शासन के निर्देश के बाद वर्ष 2013 में सैकड़ों शिक्षकों के अटैचमेंट समाप्त कर सबको मूल तैनाती स्थल पर भेज दिया गया था। लेकिन जीजीआईसी राजपुर रोड में कार्यरत चंद्रा पंत डटी रहीं।

पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रकाश पंत की पत्नी होने के नाते चंद्रा को यह ‘सुविधा’ मिली है। हालांकि, प्रिंसिपल मोहिनी थपलियाल कहती हैं कि नौ शिक्षिकाएं कम हैं, चंद्रा पंत की स्कूल को जरूरत है। चंद्रा पंत का मूल तैनाती स्थल पिथौरागढ़ है।
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...और इनकी सुध लेने वाला कोई नहीं

राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय छिनका अगस्त्यमुनि रुद्रप्रयाग की शिक्षिका जगतेश्वरी बहुगुणा के पति को पैरालाइसिक अटैक है। उनकी ब्रेन सर्जरी की गई है और गंभीर बीमारी के चलते वह बिस्तर से उठने तक की स्थिति में नहीं है।

जगतेश्वरी पिछले 20 साल से दुर्गम स्कूल में तैनात हैं, लेकिन उनका तबादला नहीं हो रहा। परिवार दून के नथुवावाला में रहता है। यहां बेटी पर पिता की देखभाल का जिम्मा है। जगतेश्वरी सात साल से तबादले के लिए अफसरों की गुहार लगा रही हैं।

राजकीय प्राथमिक विद्यालय सेंद्री चौरास कीर्तिनगर टिहरी में शिक्षिका सुमन सेमवाल की उम्र 55 वर्ष हो चुकी है। विभागीय सेवा के तीस साल इस शिक्षिका ने पर्वतीय अंचलों के दुर्गम और अति दुर्गम स्कूलों को दिए हैं।

विभाग की ओर से तय मानकों के अनुरूप तबादले के लिए उनके पास पर्याप्त आधार हैं। अब सेवानिवृत्ति के लिए भी सिर्फ पांच साल बाकी रह गए हैं। इसके बावजूद कई बार आवेदन करने पर भी उनका स्थानांतरण सुगम में नहीं किया जा रहा।

बीमार, विकलांग और अनुरोध के आधार पर तबादला पाने वाले शिक्षकों के तबादले नियमावली में संशोधन के बाद ही होंगे। विभाग भी चाहता है कि ऐसे शिक्षकों के तबादले हों, लेकिन जब तक नियमावली संशोधित नहीं होती तबादले नहीं किए जा सकते।
- आरके कुंवर, शिक्षा निदेशक बेसिक
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