उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में तैनात शिक्षक-शिक्षिकाओं अब तबादले की वजह से लाडलों की सेहत की चिंता नहीं सताएगी। गंभीर बीमार बच्चों के शिक्षक माता-पिता को संशोधित तबादला नियमावली में अनिवार्य स्थानांतरण से छूट दे दी गई है।
शिक्षिका के पति या शिक्षक की पत्नी की बीमारी पर भी यह व्यवस्था लागू होगी। यही नहीं, ऐसे शिक्षक अब पति-पत्नी या बच्चे की बीमारी के आधार पर अनुरोध पर तबादले के लिए भी आवेदन कर सकेंगे।
इससे पहले सिर्फ शिक्षक के खुद बीमार होने या बच्चों के मानसिक तौर पर कमजोर होने पर ही तबादलों में छूट का प्रावधान था।
इन पर मिलेगी छूट
-शिक्षक की पत्नी या शिक्षिका के पति के गंभीर रोगी होने पर
-अविवाहित बच्चे की हार्ट बाईपास सर्जरी, हार्ट वाल्व सर्जरी, ब्रेन ट्यूमर, एचआईवी, कैंसर पीड़ित होने पर
-शिक्षक की पत्नी या शिक्षिका के पति के 60 प्रतिशत या इससे अधिक विकलांग होने पर
-अविवाहित बच्चे के 60 फीसदी या अधिक विकलांगता पर
अब नहीं चलेगा फर्जी मेडिकल
फर्जी मेडिकल के आधार पर तबादला पाना गुरुजी के लिए अब आसान नहीं होगा। स्वास्थ्य आधार पर तबादला अर्जी के लिए शिक्षकों को राज्य चिकित्सा परिषद का प्रमाणपत्र लाना होगा। इससे पहले शिक्षक अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), राज्य में स्थित समकक्ष चिकित्सा संस्थान, फॉरेस्ट ट्रस्ट मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी, राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर, एचआईएचटी जौलीग्रांट और अपने जिलों के सीएमओ के प्रमाणपत्र के आधार पर तबादला पा जाते थे। सूत्रों के मुताबिक अधिकतर मामलों में ऐसे मेडिकल फर्जी होते थे।
दुर्गम में पांच साल वाले कर सकेंगे अनुरोध
प्रदेश में ऐसे शिक्षक जो दुर्गम स्कूलों में पांच साल की सेवा कर चुके हैं वे अनुरोध के आधार पर तबादलों के लिए आवेदन कर सकेंगे। हालांकि, यह व्यवस्था सिर्फ अति दुर्गम या विशिष्ट अति दुर्गम स्कूलों के लिए ही लागू होगी।
संशोधित नियमावली में उन शिक्षकों को छूट दी गई है, जिनके बच्चे गंभीर रोगी हैं। लेकिन इस व्यवस्था में शिक्षकों के माता-पिता नहीं रखे गए हैं। वजह यह थी कि यदि माता-पिता को भी शामिल किया जाता तो पहाड़ के स्कूल खाली हो जाते। अधिकतर शिक्षक इसे आधार बनाकर तबादला मांग सकते थे।
-राधिका झा, शिक्षा महानिदेशक