रायबरेली के पास जनता एक्सप्रेस की दुर्घटना की असल वजह तो जांच के बाद साफ होगी, लेकिन हादसे ने दून स्टेशन के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी सवाल खड़े किए हैं।
सवाल इसलिए कि हजारों यात्रियों को लेकर वाराणसी के लिए रवाना होने वाली इस ट्रेन की सुरक्षा जांच और मरम्मत की दून स्टेशन पर कोई व्यवस्था नहीं है। वह भी तब, जबकि दून स्टेशन पर यह ट्रेन करीब 12 घंटे खड़ी रहती है। ऐसे में बिना मरम्मत के यह ट्रेन खतरों के पहियों पर ही दून से निकलती है।
देहरादून से बनारस के बीच रोजाना चलनी वाली जनता एक्सप्रेस बनारस स्टेशन की ट्रेन है। बनारस से यह ट्रेन हर रोज सुबह 06:20 बजे दून पहुंचती है। शाम 06:35 बजे इसी ट्रेन को बनारस के लिए रवाना किया जाता है।
बिना जांच रवाना होती है ट्रेन
वाराणसी से जनता एक्सप्रेस ट्रेन को दून के लिए रवाना करने से पहले हर पार्ट की बारीकी से जांच होती है। कोच और इंजन में टूट-फूट, कोच की बाडी का निचला हिस्सा, गार्ड कोच, लोको पायलट सेक्शन, इलेक्ट्रिक पार्ट आदि की तकनीकी जांच होती है। जरूरत होने पर मरम्मत और पार्ट्स भी बदले जाते हैं। ब्रेक प्रेशर की जांच, सफाई और पानी से धुलाई भी की जाती है।
लेकिन देहरादून में ऐसा नहीं किया जाता है। दून स्टेशन पर जनता एक्सप्रेस में सिर्फ सेकेंडरी मेंटेनेंस (द्वितीय स्तर की मरम्मत) होती है। इसमें ब्रेक प्रेशर की जांच, कोचों की सफाई और ट्रेन में पानी भरने का ही काम होता है। जब तक कोई बड़ा पार्ट बदलना जरूरी न हो, रेलवे अधिकारी दिलचस्पी नहीं लेते।
कर्मचारियों की कमी बता रहे अधिकारी
सूत्रों के मुताबिक अधिकारी औजारों और कर्मचारियों की कमी को इसकी वजह बताते हैं। कर्मचारी भी मानते हैं कि ट्रेन भले दूसरे स्टेशन की हो, लेकिन इसकी जांच तो होनी ही चाहिए। हालांकि, प्रभारी स्टेशन अधीक्षक करतार सिंह का दावा है कि अपने स्तर से हर ट्रेन की जरूरी जांच करने के बाद ही रवाना करते हैं।