इंसान पर जब नियति की मार पड़ती है तो वह कहीं का नहीं रहता। कुछ ऐसी ही कहानी है पिथौरागढ़ के होकरा गांव निवासी एक बुजुर्ग महिला की।
छह दिन पहले बुजुर्ग महिला के पति का निधन हो गया था। सूचना पर घर आ रहे एकलौते बेटे की भी रास्ते में ही मौत हो गई जबकि बहू की पिछले साल बीमारी से मौत हुई थी।
पिता की मौत पर घर आ रहा था बेटा
पांच अप्रैल को होकरा गांव की मुंगली देवी (65) के पति प्रेम राम (70) का निधन हो गया था। पिता की मृत्यु का समाचार सुनकर बेटा हरि राम (39) मथुरा से हल्द्वानी के लिए चला।
छह अप्रैल को बस से होकरा जाते वक्त गरमपानी में हरिराम के पेट में दर्द होने लगा। बस में सवार अन्य यात्री उसे पास के अस्पताल में ले गए जहां उसकी मौत हो गई।
पोते को हुआ है टायफाइड
पति और बेटे के मौत ने मुंगली देवी को झकझोर दिया है। जीवन के अंतिम पड़ाव में पहुंची इस बुजुर्ग महिला के सिर पर पोते नवीन कुमार (15), पोती प्रेमा (12) और ललिता (9) की जिम्मेदारी आन पड़ी है। हरि राम का पुत्र नवीन इस समय टाइफाइड की बीमारी से जूझ रहा है।
2013 में हरि राम की पत्नी की बीमारी से मौत हो गई थी। मुंगली देवी के पास अपना पुराना मकान है। कुछ खेत हैं जिनमें तीन महीने का राशन पैदा होता है।
होकरा मंदिर कमेटी मदद को आगे आई
विपत्ति के मारे इस परिवार की मदद के लिए होकरा मंदिर कमेटी आगे आई है। कमेटी के अध्यक्ष दौलत सिंह, कोषाध्यक्ष गंभीर सिंह मेहता ने बताया कि मंदिर कमेटी के लोगों ने 21 हजार रुपये चंदा कर मुंगली देवी को दिए हैं।
जो लोग इस परिवार की मदद करना चाहते हैं कमेटी के कोषाध्यक्ष के फोन नंबर 05964202316 पर संपर्क कर सकते हैं।