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सीएम के काफिले से जाम हुई राजधानी

Mon, 03 Nov 2014 11:14 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने रविवार को सुबह से शाम तक करीब पांच कार्यक्रमों में शिरकत की। इस दौरान वह जहां भी गए, वहां जाम लग गया।
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लोगों को कई जगहों पर आधे-आधे घंटे तक जाम से दो चार होना पड़ा। हालांकि, जाम की एक और वजह राजधानी में कुछ परीक्षाओं का आयोजित होना भी रहा।

आधे घंटे तक जाम से दो चार होना पड़ा
दोपहर परीक्षा देने के बाद केंद्रों से बाहर निकले अभ्यर्थी घंटों तक पैदल ही घंटाघर के आसपास के बाजारों में टहलते रहे। रविवार को छुट्टी का दिन होने और शहर में कई परीक्षाओं के आयोजन से पहले ही सड़कों पर ट्रैफिक अधिक था।

परीक्षा देने के लिए अभ्यर्थी जहां विभिन्न जगहों से आए थे, वहीं लोग घूमने और बाजार आदि जाने के लिए घरों से लोग भी निकले हुए थे। इसी दौरान जब मुख्यमंत्री हरीश रावत का काफिला सड़कों पर आ गया तो पुलिस को ट्रैफिक संभालने में पसीने छूट गए।
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जाम में फंसे अधिकतर लोगों की प्रतिक्रिया थी कि मुख्यमंत्री को बहुत जरूरी कार्य से ही सड़क पर निकलना चाहिए।
मुख्यमंत्री को सुबह 10 बजे प्रिंस चौक स्थित जैन धर्मशाला में उत्तराखंड आंदोलनकारी कर्मचारी कल्याण परिषद के अधिवेशन में भाग लेना था।

इसके बाद सीएम को ओएनजीसी के एएमएन घोष ऑडिटोरियम में अनुसूचित जाति/जनजाति के सम्मेलन में दोपहर 2 बजे शिरकत करनी थी। दोपहर में ही सीएम को पटेल नगर स्थित गुरुद्वारा बाबा लक्खीशाह जी में गुरुग्रंथ साहिब के सालाना गुरु गद्दी दिवस में भाग लेना था।

शाम को मुख्यमंत्री ने राजपुर रोड स्थित जोजफ स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जब सीएम जा रहे थे तो राजपुर रोड पर गांधी पार्क तक और घंटाघर से दर्शनलाल चौक तक दोनों तरफ करीब आधे घंटे तक जाम लग गया।

हालांकि, एसपी ट्रैफिक प्रदीप कुमार राय का कहना है कि राजधानी में रविवार को कई परीक्षाओं के आयोजन के मद्देनजर ट्रैफिक पुलिस पहले से सतर्क थी। सिविल पुलिस को भी तैनात किया गया था। इस वजह से कहीं पर भी जाम की स्थिति नहीं बनी।

आरक्षण पर रोक हटाने की होगी पैरवी
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी कर्मचारी परिषद के दूसरे द्विवार्षिक सम्मेलन में शिरकत करने पहुंचे मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि उन्हें और उनके आश्रितों को सरकारी नौकरियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया जाए, लेकिन इस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है।

नौकरी में 10 प्रतिशत आरक्षण के लिए सरकार भी बाध्य है। रोक हटाने के लिए हाईकोर्ट में पैरवी की जाएगी। इस मौके पर सीएम ने उत्तराखंड आंदोलन के शहीदों के चित्र सचिवालय और विधानसभा में लगाने का ऐलान भी किया। विकास पर नजर रखने के लिए हर विभाग में परामर्श कमेटी बनाई जाएगी। इसमें आंदोलनकारियों की भागीदारी बढ़ाई जाएगी।

रविवार को जैन धर्मशाला में सम्मेलन के दौरान सभी जिलों में कार्यरत राज्य आंदोलनकारियों ने शिरकत की। इस मौके पर परिषद प्रदेश अध्यक्ष चंद्रमोहन सिंह नेगी और आंदोलनकारियों ने सीएम को ज्ञापन सौंपा।

सम्मेलन में परिषद के द्विवार्षिक चुनाव में यशवंत रावत को अध्यक्ष, जीतमणि पेन्यूली को महामंत्री और ललित जोशी को कोषाध्यक्ष चुना गया। कार्यक्रम के दौरान विधायक हीरा सिंह बिष्ट, रंजीत सिंह, चंद्रमोहन सिंह नेगी, नरपत राजपूत, संदीप चौधरी, जगमोहन खाती, पूरण लिंगवाल, शमशेर बिष्ट, उमादत जुगरान, हयात सिंह, यशवंत सिंह मौजूद थे।

भर्ती में बैकलाग का पूरा ध्यान है: सीएम
राज्य में जितनी भी भर्तियां हो रही हैं, उनमें बैकलॉग का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। राज्य में आयोग पुनर्गठन के वक्त ध्यान रखा जाएगा कि एससी, एसटी और ओबीसी को पूरा प्रतिनिधित्व मिले। यह बात रविवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत राष्ट्रीय सामाजिक न्याय कृति मंच के कार्यक्रम में कही।

ओएनजीसी के घोष ऑडिटोरियम में बतौर मुख्य अतिथि सीएम ने कहा कि देश को विकास के रास्ते पर ले जाना है तो समावेशी विकास की सोच के साथ काम करना होगा। वंचित और संघर्षशील वर्ग के कल्याण के लिए नीतियां और कानून बहुत बनाए गए हैं, लेकिन क्रियान्वयन ठीक से नहीं हो पाता है।
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कहा कि सामाजिक न्याय का लक्ष्य हासिल करने के लिए सामाजिक समन्वय से काम करना होगा। सामाजिक न्याय आंदोलन को तेज करने के लिए विशेष प्रयास करने होंगे।

सीएम ने कहा कि भूमिहीन को भूमि मुहैया कराने के लिए सरकार प्रयास कर रही है। कायक्रम में विशिष्ट अतिथि पीएस कृष्णन, संस्था अध्यक्ष नानकचंद, जस्टिस कामता प्रसाद, रवींद्र सिंह आदि मौजूद थे।
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