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सात साल बाद टीपीएस फिर बने कांग्रेस के सिपाही

Sun, 13 Apr 2014 12:35 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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ना-ना करते रिटायर फौजी टीपीएस रावत कांग्रेस की सेना में शामिल हो गए हैं। वहीं नाराज ले. जनरल गंभीर सिंह नेगी ने भी अपने अस्त्र-शस्त्र वापस ले लिए हैं।
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कांग्रेस ने इन दो फौजी अफसरों को बटालियन में शामिल कर भाजपा के जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। अब इस सीट पर देखना होगा कि पौड़ी के पूर्व फौजी किसका हुक्म मानते हैं। राजनैतिक विश्लेषकों की मानें तो पूर्व सैनिकों का वोट दो खेमों में बंटने तय हैं।

टीपीएस रावत के कांग्रेस में जाने की खबरें पिछले एक महीने से चल रही थीं लेकिन हर बार उन्होंने ही इसका खंडन किया है। हाल ही उन्होंने दल बल के साथ आम आदमी पार्टी की सदस्यता ली थी।
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माना जा रहा था कि टीपीएस आप के उम्मीदवार होंगे लेकिन आप ने टीपीएस रावत को टिकट नहीं दिया।

हरक के चलते नहीं हो रही थी वापसी

सूत्र बताते हैं कि टीपीएस की कांग्रेस में वापसी पहले ही हो जाती लेकिन मंत्री हरक सिंह रावत से उनके बिगड़े राजनैतिक रिश्ते और जमीनी प्रतिद्वंद्विता के चलते ऐसा नहीं हो सका।

हरक सिंह ने मंत्री रहते भले तमाम सैनिक कल्याण योजनाओं को जमीन पर उतारा हो। पार्टी को पता है कि टीपीएस ही सामने वाली सेना को चुनौती दे सकते हैं। हालांकि टीपीएस के लिए सीधे जनरल खंडूड़ी पर वार करना मुश्किलों भरा होगा।

टीपीएस ने 2009 में खंडूड़ी का उस समय साथ दिया जब भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटा दिया था। जिसके बाद टीपीएस ने रक्षा मोर्चा बनाया और उस समय यह मानकर चला जा रहा था कि खंडूड़ी भी उनके साथ जा सकते हैं।
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खंडूड़ी के ल‌िए छोड़ी थी सीट

टीपीएस रावत के 2007 में कांग्रेस छोड़ने का कारण मंत्री हरक सिंह रावत थे। टीपीएस कांग्रेस के टिकट पर धूमाकोट से विधायक जीतकर आए थे और हरक सिंह भाजपा छोड़कर कांग्रेस के टिकट पर लैंसडौन सीट से जीते थे।

टीपीएस और हरक सिंह में विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता पद को लेकर झगड़ा था। पार्टी ने हरक सिंह को नेता चुना।

नाराज टीपीएस ने कांग्रेस छोड़ने के साथ अपनी धूमाकोट सीट से इस्तीफा दे उसे भुवन चंद्र खंडूड़ी के लिए छोड़ दी। हरक के नेता चुने जाने के बाद टीपीएस विधानसभा के हाउस में भी नहीं गए थे।

टीपीएस भाजपा में आए तो खंडूड़ी ने उन्हें खाली हुई पौड़ी संसदीय सीट सौंप दी। 2008 में उपचुनाव हुए तो टीपीएस जीते भी। फिर 2009 में लोकसभा के चुनाव हुए तो टीपीएस चुनाव हार गए। हार के बाद टीपीएस ने भाजपा भी छोड़ दी और 2010 में खुद का रक्षा मोर्चा बना लिया।
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