वार्डन अजय शर्मा ने बताया कि पार्क के पास चार हाथी के बच्चे और दो हथनियां (राधा और रंगली) हैं। मोतीचूर रेंज में एक गुलदार की आबादी वाले इलाके में चहलकदमी बढ़ गई है। इस कारण दोनों हथनियों को मोतीचूर में गश्त के लिए लगाया गया है। रोजाना गुलदार की मॉनिटरिंग की जाती है और हथनियों के साथ गश्त की जाती है। इस कारण इस बार पार्क में हाथी सवारी नहीं कराई जाएगी।
वन विभाग को वर्ष 1993 में रेलवे ट्रैक समीप एक हाथी का बच्चा मिला था। इसे राजाजी पार्क को सौंप दिया गया और उसका नाम राजा रखा गया। राजा को ट्रेनिंग दी गई और बाद में राजा को पर्यटकों को सवारी कराने अथवा गश्त के कार्यों में उपयोग किया जाता रहा, लेकिन बीते वर्ष जंगली हाथी के साथ आपसी संघर्ष में राजा की मौत हो गई थी। इस कारण विभाग के पास फिलहाल पर्यटकों को सवारी कराने के लिए हाथी नहीं है।