प्रदेश में पर्यटन और तीर्थाटन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की कई स्थानों पर रोपवे बनाने की योजना है। रोपवे निर्माण के लिए सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के साथ एमओयू किया है। पहले चरण में एनएचएआई की अधीन नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड (एनएचएलएमएल) को सात रोपवे की डीपीआर तैयार करने का काम सौंपा गया है। जिसमें केदारनाथ रोपवे, नैनीताल रोपवे, हेमकुंड साहिब रोपवे, पंचकोटी से नई टिहरी, औली से गौरसू, मुनस्यारी से खलिया टॉप तथा ऋषिकेश से नीलकंठ महादेव शामिल है। केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे की डीपीआर तैयार हो गई है। पर्यटन विभाग ने रोपवे के वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिसके बाद टेंडर किए जाएंगे। रोपवे निर्माण से केदारनाथ और हेमकुंड साहिब तक श्रद्धालु आसानी से पहुंच सकेंगे।
प्रदेश में नए स्थानों को रोपवे से जोड़ने की योजना
पर्वतमाला योजना के तहत नए रोपवे निर्माण के लिए सभी 13 जिलों से 41 प्रस्ताव सरकार को मिले हैं। अब शासन स्तर पर जिलों के प्रस्ताव का अध्ययन करने के बाद अगली कार्रवाई की जाएगी, जिसमें यह देखना जाएगा कि रोपवे जोड़े जाने वाले स्थान पर पर्यटकों और श्रद्धालुओं की आवाजाही कितनी है और रोपवे निर्माण का आकलन किया जाएगा। इसके बाद ही केंद्र को रोपवे का प्रस्ताव भेजा जाएगा।
केदारनाथ व हेमकुंड साहिब रोपवे की डीपीआर तैयार कर ली गई है। दोनों रोपवे के लिए वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया चल रहा है। इसके बाद ही टेंडर किए जाएंगे। इसके अलावा पर्वतमाला योजना के तहत सभी जिलों से 41 नए स्थानों के लिए रोपवे निर्माण करने के प्रस्ताव मिले हैं। - दिलीप जावलकर, सचिव पर्यटन