जिले में बीते छह सालों से हॉकी एस्ट्रो टर्फ तक नहीं बन सका है। खेल अधिकारियों की ओर से कई बार हॉकी एस्ट्रो टर्फ का प्रस्ताव शासन में भेजा गया, लेकिन आज तक सरकार की ओर से इसे मंजूरी नहीं मिल सकी है।
पिथौरागढ़ : 1785 स्कूलों में से कुछ में ही खेली जाती है हॉकी
जिले में 1785 स्कूल हैं। इन सभी में कुछ बच्चे हॉकी खेलते हैं। मगर भारतीय हॉकी टीम के ओलंपिक इतिहास की उन्हें कोई जानकारी नहीं है। हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद के बारे में हॉकी खेल से संबंधित खिलाड़ी तो जानते हैं, मगर 70 फीसदी बच्चे हॉकी के जादूगर को नहीं जानते हैं। जिले में हॉकी खिलाड़ियों के खेलने के लिए हॉकी मैदान नहीं है। जिले के अंतरराष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ियों में दिगांस (वड्डा) निवासी महेंद्र सिंह बोहरा, धनौड़ा के स्व. रमेश चंद्र पटियाल, हरिप्रिया रौतेला कनालीछीना के उमरी गांव की मंजू बिष्ट, पिथौरागढ़ निवासी विनय प्रमुख नाम हैं।
नैनीताल में हॉकी के दो ही मैदान
जिले में हॉकी के दो ही मैदान हैं। इनमें एक फ्लैट्स नैनीताल और दूसरा हल्द्वानी स्टेडियम। जिले में टर्फ मैदान एक भी नहीं है। लगभग एक दर्जन से अधिक स्कूलों में हॉकी खेली जाती है। हॉकी के लिए स्कूलों में कोई विशेष मैदान नहीं हैं। जिले में सैयद अली और राजेंद्र सिंह रावत दो ओलंपियन हैं और राकेश टंडन, ललित साह, एनडी बिष्ट, हरीश भाकुनी समेत आधा दर्जन खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं। हॉकी के ओलंपिक इतिहास से अधिकतर बच्चे अनजान हैं।
चंपावत जिले में एक भी हॉकी मैदान नहीं
1980 के मास्को ओलंपिक में मिले स्वर्ण पदक के 41 साल बाद भारतीय हॉकी टीम को टोक्यो ओलंपिक में मिले कांस्य पद से हर किसी की बांछें खिली हैं। इसे लेकर हर ओर जश्न तो है लेकिन यहां के खिलाड़ियों को चंपावत में हॉकी खेल के लिए आधारभूत सुविधाओं के अभाव का मलाल भी है। डीएसओ आरएस धामी का कहना है कि चंपावत जिले में हॉकी का एक भी खेल मैदान नहीं है। जिले के 144 स्कूलों में से पांच प्रतिशत में ही हॉकी खेली जाती है।
बागेश्वर : अधिकतर बच्चे राष्ट्रीय खेल से अनजान
यहां हॉकी एसोसिएशन ने वर्ष 2000 में नुमाइशखेत मैदान में कारगिल शहीदों के सहायतार्थ मैच कराया। खेल प्रेमी मानते हैं कि हॉकी को बढ़ावा दिलाने के लिए सुविधाओं का होना बेहद जरूरी है। यहां अधिकतर बच्चों को हॉकी के राष्ट्रीय खेल होने के बारे में भी पता नहीं है। हॉकी एसोसिएशन बागेश्वर के जिला सचिव कमल साह जगाती का कहना है कि जिले में हॉकी मैदान और सुविधाओं की सख्त दरकार है।
अल्मोड़ा : 10 फीसदी स्कूलों में ही खेली जाती है हॉकी
जिले में हॉकी खेल का अस्तित्व नाम भर के लिए है। एकमात्र अल्मोड़ा स्टेडियम ही हॉकी खेल की सुविधा देता है। जिले में अन्य कहीं भी इस खेल से संबंधित मैदान नहीं है। स्कूलों में भी हॉक बहुत कम प्रचलित है। जिले के 10 प्रतिशत स्कूलों में ही हॉकी खेल की सुविधा है। अब तक यहां से मीररंजन नेगी के अलावा हॉकी में कोई भी खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर में नहीं पहुंचा है।
कहते हैं खिलाड़ी
अपने पैसे से खरीदनी पड़ती है हॉकी स्टिक
राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी आंचल का कहना है कि घास के मैदान में हॉकी का प्रशिक्षण लेते हैं, इस वजह से अच्छा परफार्म नहीं कर पाते हैं। हाल ये है कि खुद के पैसे से हॉकी स्टिक खरीदनी पड़ती है। राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रोहन रावत के अनुसार सरकार अगर एस्ट्रोटर्फ की सुविधा दे तो यहां के खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक राज्य का नाम रोशन कर सकते हैं। राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी दीपांशु असवाल और रितिक सैनी ने भी कहा कि उन्हें भी सुविधाएं मिलें तो वे देश का नाम रोशन कर सकते हैं।