चौबट्टाखाल के भाजपा विधायक तीरथ सिंह रावत ने कहा है कि अगर वह नेता होते तो उनका टिकट नहीं कटता। पर आजकल नेता दूसरे लोग हो गए हैं। फिर भी पार्टी का जो आदेश होगा वही करेंगे। तीरथ ने यह भी जोड़ा कि वह भ्रष्टाचार से बाहर और ‘अंदर’ भी लड़ते रहेंगे।
मंगलवार को बलबीर रोड स्थित पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में कुछ कांग्रेसियों के भाजपा में शामिल होने के कार्यक्रम में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत भी मौजूद थे। उनका टिकट कटने पर सवाल पूछे गए तो भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत का दर्द छलक पड़ा। टिकट कटने से नाराजगी के सवाल पर तीरथ बोले कि पीड़ा स्वाभाविक है।
यह कष्ट मुझको नहीं मेरे कार्यकर्ताओं को, आम जनता को हुआ है। यह पीड़ा दिख भी रही है। आखिर मैं कार्यकर्ता हूं, सिपाही हूं। मैं जिन भी पदों पर रहा मैंने कार्यकर्ता के तौर पर काम किया, न कि नेता के तौर पर। यदि मैं नेता होता तो शायद मेरे साथ आज यह स्थिति नहीं होती, लेकिन मैं नेता नहीं हूं।
मैं आज भी कार्यकर्ता हूं, सिपाही हूं। तीरथ यहीं नहीं रुके, वह बोले कि फिर भी जो मेरे लिए आदेश होगा मैं वही करूंगा, लेकिन प्रदेश में फैले भ्रष्टाचार से बाहर भी और ‘अंदर’ भी लड़ता रहूंगा। तीरथ ने कहा कि वास्तव में मैं विधायक रहा हूं, प्रदेश अध्यक्ष रहा हूं। संगठन की कई जिम्मेदारियों पर रहा हूं और राष्ट्रीय स्तर पर भी काम किया।
तीरथ ने कहा कि भाजपा में उन्होंने ऐसा दौर भी देखा जबकि पार्टी के अंदर कुछ नहीं था। अटल जी का साथ भी देखा है। इसके बाद कांग्रेस की हरीश सरकार में प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में पार्टी और जनता के साथ खड़े रहने की बात कहकर तीरथ ने अपने बयान को संतुलित करने की कोशिश भी की।