1. बाघों की सुरक्षा के लिए वन विभाग को अधिक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। आरक्षित वन क्षेत्र से इतर वन क्षेत्रों में संसाधन बढ़ाए जाने की जरूरत है।
2. वन विभाग के मुखबिर तंत्र को मजबूत किया जाए।
3. प्रभागीय वन अधिकारियों को इंडियन टेलीग्राफिक एक्ट 1885 के तहत अधिकार प्रदान किए जाएं। इस एक्ट के तहत टेलीग्राम अधिकारियों को किसी संदेश या संदेशवाहक को जब्त करने, पूछताछ करने का अधिकार होता है।
4. प्रदेश में वन रक्षकों की संख्या बेहद कम है। इनकी संख्या बढ़ाई जाए और वन कर्मियों को अत्याधुनिक हथियार उपलब्ध कराए जाएं
5. प्रभावित व्यक्तियों को तुरंत मुआवजा देने की व्यवस्था की जाए।
...हाईकोर्ट भी जता चुका है चिंता
बाघों की मौत पर उत्तराखंड हाईकोर्ट भी चिंता जता चुका है। हाईकोर्ट ने तो वन विभाग को यहां तक कहा था कि यहां अगर बाघों की सुरक्षा नहीं हो सकती है तो सारे बाघों को गुजरात के राष्ट्रीय पार्क में भेज दिया जाए। संजीव ने यह रिपोर्ट हाईकोर्ट के आदेश के बाद ही तैयार की थी। संजीव की ओर से अब इस मामले में एक नियमित जांच अधिकारी नियुक्त करने का सुझाव भी दिया गया है।