पहले आरामतलबी का रवैया और अब आपदा का बहाना। नौकरशाही की जिम्मेदारियों के प्रति लापरवाही से प्रदेश के खेल और खिलाड़ियों का भविष्य अधर में है।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम का सपना अभी कागजों से बाहर नहीं निकल सका है तो पवेलियन ग्राउंड पर इस बार भी फुटबाल लीग होने की कोई उम्मीद नहीं है।
इन हालात में खिलाड़ियों के पास सिवाय परेड ग्राउंड के खेलने और अभ्यास करने के लिए कोई जगह नहीं बचती, लेकिन यहां भी गड्ढे और कीचड़ उनके लिए मुसीबतों का सबब बना रहता है।
हालांकि, खेल मंत्री लगातार खेल सुविधाओं को बढ़ाने की बात कह रहे हैं, लेकिन नौकरशाही का जो हाल है उसे देख इस पर अमल होना सपना ही लगता है।
नौ महीने बाद भी बस लगा है शिलान्यास पट
महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स कॉलेज परिसर से लगी जमीन पर 15 नवंबर 2012 को राजीव गांधी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम की नींव रखी गई। मगर वो अब तक रखी की रखी है। तब मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने मंच से स्टेडियम का काम जल्द शुरू कराने के बड़े-बड़े दावे किए थे।
मगर नौ महीने बीतने के बाद भी यहां शिलान्यास का पत्थर स्टेडियम बनने की आस में पड़ा हुआ है। राज्य में क्रिकेट के पहले अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम के निर्माण के लिए खेल विभाग ने ओएनजीसी के साथ मिलकर पहल की थी। ओएनजीसी ने इसके लिए तब 50 करोड़ रुपए दिए थे, साथ ही भविष्य में बढ़ाने की बात भी कही थी।
स्टेडियम के शिलान्यास के बाद राज्य के आला अफसरों के दल ने कई बार नागपुर, जयपुर, सौराष्ट्र, मुंबई, दिल्ली, धर्मशाला, मोहाली सहित अन्य क्रिकेट स्टेडियमों को देखा और राज्य के क्रिकेट स्टेडियम की परिकल्पना बनाई।
हालांकि यह कैसा है, इस बारे में कोई खुलासा नहीं किया गया। शिलान्यास के दिन मुख्यमंत्री के दावों को देखकर लगा था कि अगले दो-ढाई सालों में स्टेडियम तैयार हो जाएगा।
राजीव शुक्ला ने आईपीएल मैच कराने की घोषणा कर दी थी
तब तत्कालीन आईपीएल कमिश्नर राजीव शुक्ला ने भी यहां आईपीएल मैच कराने की घोषणा कर दी थी। मगर हकीकत में यहां नौ महीने बाद भी शिलान्यस के पत्थर के अलावा निर्माण एजेंसी का केबिन और मजदूरों के कच्चे मकान बने हैं। जो करीब 10 दिन पूर्व ही बनाए गए हैं। आजकल यहां मैदान की नपाई जरूर की जा रही है।
ऐसे स्टेडियम का है सपना
दर्शक क्षमता: 25 से 30 हजार
आकार: 143 गुणा 160 मीटर के मैदान में तीन टर्फ विकेट
पवेलियन: एक ग्रांड स्टैंड, ड्रेसिंग रूम और वीआईपी दर्शक दीर्घा
विशेष: अलग पत्रकार दीर्घा, कमेंट्रेटर बॉक्स
अधिकारियों की खींचतान, खिलाड़ी हलकान
शहर के बीचों-बीच बना पवेलियन ग्राउंड दून का ऐतिहासिक फुटबॉल मैदान है, जिसकी नींव आजादी से पूर्व ही पड़ गई थी। राज्य बनने के बाद 2011 में सुधारने के लिए बंद किया गया, तो अब तक नहीं खुल सका।
खेल विभाग व नगर निगम की लड़ाई में खूबसूरत बन चुके मैदान पर खेलना खिलाड़ियों के लिए अभी भी बस सपना ही बना हुआ है। नगर निगम के 25लाख रुपए न देने से खेल विभाग ने अब खुद ही पवेलियन की जिम्मेदारी लेने की बात कही है।
मगर खेल विभाग को भी अब करीब 20 लाख रुपए निर्माण एजेंसी को देने हैं। वहीं दूसरी ओर पवेलियन की हालत में कोई सुधार नहीं हो सका है। खस्ताहाल पवेलियन स्टैंड अभी भी सुंदरीकरण की बाट जोह रहा है।
तो ग्राउंड से दूर बनी दर्शक दीर्घा भी खस्ताहाल है। साल भर पहले खेल मंत्री ने यहां खाली पड़ी जगह पर स्वीमिंग पूल या बास्केटबाल कोर्ट बनाने का प्रस्ताव देने को कहा था, लेकिन अफसरों ने इस पर ध्यान नहीं दिया। ऐसे में खाली पड़ी जमीन अभी बतौर पार्किंग इस्तेमाल कर ली जाती है।
इनकी सुनिए
'खेल विभाग क्रिकेट स्टेडियम का निर्माण जल्द शुरू कराने की कोशिश कर रहा है। इसके लिए खाका भी तैयार हो गया है। दो-ढाई साल में स्टेडियम तैयार हो जाएगा। वहीं पवेलियन ग्राउंड में हुए निर्माण का भुगतान खेल विभाग खुद करेगा। जल्द ही मैदान खिलाड़ियों के लिए खुल जाएगा।'
दिनेश अग्रवाल,खेल मंत्री