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साहब जिस दिन भी गए, उस दिन यह पिटा...

Sun, 21 Jul 2013 07:06 PM IST
देहरादून/ इंटरनेट डेस्क
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कहतें हैं ऊपरवाला मेहरबान तो गधा पहलवान। कुछ ऐसे ही इन दिनों पुलिस के जिला ऑफिस में भी देखने को मिल रहा है।
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हवलदार साहब दिन भर शहर में डंडे का रौब दिखा जनता की घिघ्घी तो बंधा आते हैं लेकिन ऑफिस पंहुचते ही एक लल्लू राम सारी हवलदारी सिर्फ अपनी अधनिकली मूंछों से ही निकाल देता है।

अब बेचारे हवलदार बाबू परेशान हैं कि शहरभर के बेचारे गरीब ठेली लगाने वाले लोग उन्हें देखते ही नमस्ते साहब करते फिरते हैं और अपने ही ऑफिस में उन्हें भीगी बिल्ली बनकर दिन गुजारना पड़ता है।
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दरअसल पुलिस के जिला ऑफिस में एक युवक काम करता है। इशारों से बात किया करता है बेचारा। युवक अवैतनिक सेवा देता है और अधिकारियों का मुंह लगा हुआ है। ऑफिस में हैसियत इतनी कि एक बार एक कांस्टेबल ने उसे चिढ़ा दिया और दूसरे दिन कांस्टेबल का ट्रांसफर हो गया।

अधिकारी उस पर इस कदर फिदा हैं कि उसके खिलाफ एक शब्द सुनना पसंद नहीं करते। करें भी क्यों न पंसद। जो भी अधिकारी कार से उतरे, उसे पूरे प्रोटोकोल के साथ उसके ऑफिस तक छोड़ता है। उससे खुश अधिकारी कभी सौ का नोट तो कभी पांच सौ नोट उसके हाथ में थमा देते हैं।

किसी की मजाल की कोई उसकी तरफ आंख उठा कर भी देख ले। हड़काना तो दूर की बात है। वह इशारों से मुंछे बनाता और कांस्टेबल को डराता है की वह मुंछो वाले अधिकारी से शिकायत कर वर्दी उतरवा देगा। हर कांस्टेबल उससे खुन्नस खाए बैठा है। अक्सर कांस्टेबल बुदबुदाते हुए मिल जाते हैं कि जिस दिन साहब का ट्रांसफर हुआ, उस दिन यह पिटा।
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अब क्या करें भाई युवक की भी क्या गलती और साहब की भी भला क्या तुनकमिजाजी। जमाना ही चाटुकारिता का है भाई। साहब को भी चाटुकारों से खासा लगाव है, शायद साहब काे इस युवक को देखकर अपनी जवानी के दिन याद आ जाते हैं।
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