बीग बैंग थ्योरी के बाद अब टीएमटी यानी थर्टी मीटर टेलीस्कोप ब्रह्मांड के राज से पर्दा उठाएगा।
अंतरराष्ट्रीय टीएमटी परियोजना में भारत के डिप्टी डायरेक्टर प्रो. एएन रामप्रकाश ने कहा है कि थर्टी मीटर टेलीस्कोप यानी 'टीएमटी’ ब्रह्मांड के रहस्यों जैसे इसकी आयु की जानकारी जुटाने में भी मददगार साबित होगी।
अब तक खोजे गए तारे और अन्य ग्रह उपग्रह की खोज के बाद ब्रह्मांड की आयु 13.7 बिलियन वर्ष बताई जाती है, लेकिन ब्रह्मांड की शुरुआत को सीमाओं में बांधने के बजाए यही कहा जा सकता है कि इसकी आयु अनंत है।
आर्य भट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) में ‘टीएमटी : चुनौती एवं अवसर’ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में बतौर मुख्य वक्ता प्रो. प्रकाश ने कहा कि टीएमटी से अब तक अदृश्य नए तारों और गृहों की खोज की जा सकेगी।
डायरेक्टर प्रो. ईश्वर रेड्डी ने कहा कि टीएमटी स्थापना से भारत की इंजीनियरिंग, तकनीक और विज्ञान तेजी से विकसित होगा, जो इलेक्ट्रॉनिक और अन्य क्षेत्रों की क्रांति में भी सहायक हो सकता है।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. शशिभूषण पांडे ने टीएमटी, आकाशगंगा में तारे के बनने की प्रक्रिया और विस्फोट के बारे में बताया।
भारत की भागीदारी 10 फीसदी
वैज्ञानिकों ने कहा कि टीएमटी भारी द्रव्यमान के तारे, नए तारे, उनके सामने के ग्रह, ब्लैक होल, न्यूट्रान और तारे के गुच्छे के रहस्य को जानने में भी सहायक होगी।
दो दिन की कार्यशाला में टेलीस्कोप क्या है, इसमें प्रयुक्त होने वाले उपकरण, प्रोग्रेस और भविष्य के सदुपयोग पर मंथन किया गया, जिन्हें संकलित कर रिपोर्ट भी तैयार की जाएगी।
इस मौके पर आईआईए बंगलूरू के प्रो. अनुराग, प्रो. ए सुब्रह्मण्यम, अरुणा गोस्वामी, प्रो. सुजैन सेन गुप्ता, सी जार्ज, आईएफआर के डॉ. मनोज, ओस्मानिया के डॉ. प्रियासन, दिल्ली विवि के डॉ. एचपी सिंह, आयुका पुणे के प्रो. वरुण, एसएन बोस कोलकाता के सोमित मंडल, एरीज के डॉ. आलोक गुप्ता, डॉ. महेंद्र सिंह, डॉ. विजय, डॉ. योगेश, डॉ. सतीश कुमार आदि मौजूद थे।
अंतरराष्ट्रीय टीएमटी परियोजना में यूएसए की भागीदारी 25 फीसदी, जापान और कैनाडा की 20-20 फीसदी, चाइना की 15 जबकि भारत की भागीदारी 10 फीसदी है। शेष 10 फीसदी की भागीदारी अमेरिका की नेशनल साइंस फाउंडेशन की है।
भारत के तीन संस्थान शामिल
परियोजना में भारत के तीन प्रमुख खगोलिक संस्थान आईआईए बंगलूरू, एरीज नैनीताल और आयुका पुणे शामिल हैं। शेष संस्थान सहयोगी के रूप में रहेंगे।
सेंसर बताएगा समस्या, एक्च्युवेटर करेगा समाधान
टेलीस्कोप में प्रयुक्त प्राथमिक मिरर के 492 सिगमेंट में भागीदारी के साथ ही भारत सेंसर एज सिस्टम और एक्च्युवेटर भी बनाएगा। यह सेंसर एलाइनमेंट की प्राब्लम को बताएगा और एक्च्युवेटर उसे त्वरित दुरुस्त कर देगा।
अंतरराष्ट्रीय टीएमटी परियोजना में भारत के डिप्टी डायरेक्टर प्रो.एएन रामप्रकाश ने बताया कि एक सिगमेंट में 12 सेंसर और तीन एक्च्युवेटर लगेंगे। इस प्रकार 5904 सेंसर और 1476 एक्च्युवेटर बनाए जाएंगे।
प्रो.प्रकाश ने बताया कि जनरल आप्टिक्स एशिया लिमिटेड पांडुचेरी की ओर से सेंसर के लगभग 25 प्रोटोटाइप बना लिए गए हैं, जिन्हें वैज्ञानिकों की ओर से स्वीकृत भी कर लिया गया है।
अवसरला बंगलूरू तथा गोदरेज कंपनी की ओर से एक्च्युवेटर के प्रोटोटाइप बनाए जा रहे हैं। वैज्ञानिकों की स्वीकृति के बाद दोनों में से किसी एक को एक्च्युवेटर बनाने का जिम्मा सौंपा जाएगा।
इसके अलावा सिगमेंट सपोर्ट भी भारत में तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 2017 तक भारत टीएमटी के लिए दी गई जिम्मेदारी को लगभग पूरी कर टीएमटी प्रोजेक्ट प्रबंधन को सौंप देगा।
क्या है टीएमटी
वर्ष 2001 व 2003 में पहली बार दुनिया भर के खगोल विज्ञानियों द्वारा देखा गया 30 मीटर व्यास की आप्टिकल दूरबीन ‘थर्टी मीटर टेलीस्कोप यानी टीएमटी’ का ख्वाब अब ताबीर होने की राह पर चल पड़ा है।
नैनीताल स्थित एरीज में दुनिया की इस स्वप्न सरीखी दूरबीन का आधार यानी सेगमेंट सर्पोटिंग एसेंबली नाम के करीब 60 हिस्से बनाए जाएंगे।
आधार के इन हिस्सों पर ही इस विशालकाय 56 मीटर ऊंची व करीब 10 टन भार की दूरबीन का वजन इसे पूरे आकाश में देखने योग्य घुमाने के साथ उसे सहने का गुरुत्तर दायित्व होगा।
इन महत्वपूर्ण हिस्सों के निर्माण की तैयारी के क्रम में निर्माता कंपनियों के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। गौरतलब है कि ‘टीएमटी’ की महांयोजना करीब 1.3 बिलियन डॉलर यानी करीब 7,500 करोड़ रुपयों की है।
भारत सहित छह देश-कैलटेक (कैलिफोर्निया इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) अमेरिका, कनाडा, चीन व जापान इस महायोजना में मिलकर कार्य कर रहे हैं।