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दो बार स्मार्ट सिटी में झटका, तीसरी बार भी उसी कंपनी को जिम्मा

Sun, 05 Jun 2016 02:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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स्मार्ट सिटी
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स्मार्ट सिटी पर दो बार मुंह की खाने के बाद अभी भी उत्तराखंड सरकार का बहुराष्ट्रीय कंसलटेंट कंपनी प्राइस वाटर हाउस कूपर्स (पीडब्लूसी) से मोह नहीं छूट रहा। यह कंपनी स्मार्ट सिटी के लिए सारी कवायद कर रही है। लेकिन, यह केंद्र सरकार के मानकों पर खरी नहीं उतर पाई है। 30 जून को दिए जाने वाले प्रस्ताव में भी इसी कंपनी को ही मसौदा तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया है।
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कंपनी ने दी सफाई
इस पर प्राइस वाटर हाउस कूपर्स (पीडब्लूसी) के अधिकारियों का कहना है कि स्मार्ट सिटी के बारे में मानक तय नहीं हैं। यह सब कुछ शहरी विकास मंत्रालय के स्मार्ट सिटी सेक्शन के अधिकारियों व विशेषज्ञों के विवेक पर निर्भर है। उनके मानक बदलते रहते हैं और नजरिया भी समान नहीं रहता।

स्मार्ट सिटी में सेलेक्शन न होने के लिए कंसलटिंग कंपनी को दोष देना ठीक नहीं है। हमारी सीमित भूमिका रहती है। मेयर विनोद चमोली ने कहा कि पहले वाले प्रस्ताव के बाद हम 100 में से 97 नंबर पर थे। इस बार 23 शहरों में हम 17 वें स्थान पर हैं। पहले से हमारी रैंकिंग बहुत बेहतर हुई है। इस बार कंसलटेंट की भूमिका को अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।
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केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय निदेशक ने खोली कंपनी की कलई

स्मार्ट सिटी - फोटो : प्रतीकात्मक
शहरी विकास मंत्रालय में स्मार्ट सिटी प्रभाग के निदेशक मुनीश कुमार गर्ग ने यहां से भेजे गए स्मार्ट सिटी के प्रस्ताव पर नोडल एजेंसी व कंसलटेंट की कलई खोल दी थी। उन्होंने राज्य सरकार को पत्र लिखकर साफ तौर पर कहा था कि प्रस्ताव में देहरादून की बेहतरी के लिए उठाए गए कदमों के बारे में आवश्यक तथ्य व आंकड़े तक नहीं प्रदान किए गए।

सिटी प्रोफाइल, रणनीति, विजन और लक्ष्य के मध्य संबंधों का विवरण बेहद कमजोर था। स्व विश्लेषण और विजन के मामले में भी प्रस्ताव का एक दूसरे से लिंक न के बराबर था। उनके पत्र में साफ उल्लेख था कि चयनित क्षेत्रफल तय मानक से चार गुना अधिक था। जो क्षेत्र सबसे चुनौतीपूर्ण था उसके समाधान के बाबत प्रस्ताव में कुछ था ही नहीं। कुलमिलाकर देहरादून स्मार्ट सिटी का प्रस्ताव बेहद कमजोर था।
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