तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर के कपाट गुरूवार को शुभ लग्नानुसार सुबह आठ बजे शीतकाल में छह माह के लिए बंद हो जाएंगे।
दो दिन के रात्रि प्रवास के बाद बाबा भोले की डोली शीतकालीन पूजा गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंचेगी। जहां शीतकाल के दौरान तुंगनाथ मंदिर में भोले बाबा की पूजा संपन्न होगी।
पंचकेदारों में सबसे ऊपर
तुंगनाथ मंदिर पंचकेदारों में सबसे अधिक ऊंचाई (सम्रुद तल 12,070 फीट) पर स्थित है। बावजूद इसके शिव के इस धाम तक पहुंचना सबसे सुगम है। यहां मोटर मार्ग से मात्र तीन किलोमीटर पैदल चलकर पहुंचा जा सकता है।
परंपरानुसार, विजयदशमी के पर्व पर तुंगनाथ मंदिर के कपाट बंद होने की तिथि निकाली गई थी। इसके अनुसार, बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे तुला लग्न में मंदिर के कपाट बंद होंगे। इस दिन बाबा की डोली रात्रि विश्राम के लिए चोपता पहुंचेगी।
एक नवंबर को मक्कूमठ पहुंचेगी डोली
शनिवार को बाबा तुंगनाथ की डोली चोपता से प्रस्थान कर रात्रि विश्राम के लिए भनकुन (बनियाकुंड)पहुंचेगी। एक नंवबर को बाबा की डोली भक्तों के साथ शीतकालीन पूजा गद्दीस्थल मक्कूमठ स्थित तुंगनाथ मंदिर में प्रवेश करेगी।