मध्य हिमालय में स्थित तृतीय केदार तुंगनाथ मंदिर के कपाट पूजा अर्चना के बाद शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए हैं। बृहस्पतिवार मको भोले बाबा की चल विग्रह उत्सव डोली प्रथम प्रवास के लिए चोपता पहुंच गई।
शुक्रवार को बाबा की डोली भनकुन (बनियाकुंड) और शनिवार को शीतकालीन पूजा गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंचेगी, जहां शीतकाल के छह माह भोले बाबा दर्शन देंगे।
10:30 बजे सुबह बंद हुए कपाट
पंचकेदारों में तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट सुबह 10.30 बजे तुला लग्न में बंद कर दिए गए। कपाट बंद होने से पूर्व श्रद्धालुओं द्वारा जलाभिषेक सहित सभी पूजाएं संपन्न कराई गई। सुबह छह से सात बजे तक लगभग 100 श्रद्धालुओं ने शिवलिंग का जलाभिषेक किया।
आठ से नौ बजे तक भोले को इस वर्ष की यात्रा का अंतिम भोग लगाया गया। 10 बजे तक मंदिर में विभिन्न प्रकार की पूजाएं संपन्न कराई गई।
चोपता पहुंची डोली
इसके पश्चात भगवान तुंगनाथ के स्वयंभू लिंग को समाधि रुप देते हुए बुग्यालों में उगने वाले श्वेत पुष्पों से ढक दिया गया। साढे़ 10 बजे मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए। चल विग्रह डोली ने मंदिर की तीन बार परिक्रमा करने के बाद शीतकालीन प्रवास के लिए प्र्रस्थान किया। मध्याह्न लगभग 12 बजे डोली चोपता पहुंच गई।