फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आपदा में लुटवाकर खाली हाथ बैठे ग्रामीण

Sun, 28 Jul 2013 10:19 AM IST
उत्तरकाशी/रविंद्र थलवाल
विज्ञापन
विज्ञापन
उत्तराखंड की गंगोत्री घाटी में आपदा के दौरान फंसे तीर्थयात्रियों के लिए मददगार बने गरमपानी गणेशपुर के निवासी अब खुद संकट में हैं।
विज्ञापन


इन लोगों ने उस समय न केवल अपने घर में मौजूद राशन से लोगों को भोजन कराया बल्कि चंदा एकत्रित करके भी उनकी मदद की।

चलने में असमर्थ यात्रियों को पहाड़ी पगडंडियां भी पार कराई। अब वे खुद मदद की गुहार लगा रहे हैं। गंगा नदी के कटाव से वार्ड के 48 भवनों को खतरा बना हुआ हैं। कई परिवार अपना घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां तो कई किराये के मकान में रह रहे हैं।

सरकारी मदद के नाम पर अभी तक 15-15 किलो चावल-गेंहू और लालटेन के अलावा कुछ नहीं मिल पाया। शनिवार को जब यह संवाददाता गवाणा ग्राम पंचायत के वार्ड गरमपानी पहुंचा तो यहां कई घर खाली थे।
विज्ञापन


ग्रामीणों ने बताया कि इस वार्ड में 48 परिवार रहते हैं, लेकिन 16-17 जून की बाढ़ के बाद से पूरे वार्ड को खतरा बना हुआ है। कई परिवार अपने घर छोड़कर रिश्तेदारों के यहां चले गए तो कई किराये के मकानों में रहे हैं। जो लोग अपने घरों में हैं, वह भी बारिश के दिन सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाते हैं।

स्थानीय निवासी आशा देवी ने बताया कि बाढ़ के बाद विधायक, डीएम और भी कई अन्य अधिकारी यहां आए लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिल पाई। एडी आर्य ने बताया कि बादल मंडराते ही लोग दशहत में आ जाते हैं।

केस-1
गरमपानी गणेशपुर की वार्ड सदस्य मुन्नी देवी का घर खतरे की जद में है। वह अपने चार बच्चों के साथ किराए के मकान में रह रही है। मुन्नी ने 16-17 की आपदा से गंगोत्री घाटी में फंसे यात्रियों की मदद के लिए भंडारे के लिए पूरे वार्ड में 50-50 रुपये एकत्रित कर राशन जुटाया था।
विज्ञापन


केस-2
राममोहन रावत के घर पर भी बाढ़ का खतरा है। वे अपने परिवार के चार सदस्यों के साथ आश्रम में शरणार्थी के रूप में रहने को मजबूर हैं। राममोहन यात्रियों ने गंगोत्री घाटी में फंसे यात्रियों को न केवल खाना खिलाया, बल्कि असमर्थ यात्रियों को पहाड़ी पगडंडियां भी पार कराई।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें