राजाजी नेशनल पार्क के मोहंड वन क्षेत्र में पिछले एक माह में जिस तरह गुलदारों ने अपनी चहलकदमी से पर्यटकों का दिल जीता है, उससे राजाजी प्रशासन मोहंड में काबिनी नेशनल पार्क का अक्स देख रहा है। दरअसल काबिनी नेशनल पार्क जंगली जानवरों के आसानी से नजर आने के लिए विख्यात है। ऐसा ही अब मोहंंड में हो रहा है। गुलदारों ने मोहंड को अपना नया ठिकाना बनाया है। रोड कनेक्टिविटी के कारण पर्यटक बड़ी संख्या में यहां गुलदारों को देखने पहुंच रहे हैं। गुलदार भी पर्यटकों को अपने करतब खूब दिखा रहे हैं। जंगल के अंदर गुलदारों की मस्ती का एक वीडियो भी खूब चर्चा में है, जिसमें पेड़ पर चढ़कर दो गुलदार एक दूसरे के साथ खेल रहे हैं। राजाजी प्रशासन के मुताबिक गुलदारों की ऐसी मस्ती अपनी आंखों से देखना पर्यटकों के लिए अजूबे से कम नहीं है।
राजाजी नेशनल पार्क में गुलदारों का कुनबा बढ़ता जा रहा है। वन अभ्यारण्य क्षेत्र में 200 गुलदार हैं। उधर राजाजी पार्क के पश्चिमी भाग में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से लाकर बाघों को ट्रांसलोकेट किया गया है। इसका असर भी गुलदारों पर पड़ा है। गुलदारों ने मोहंड को अपनी नई पसंद बनाया है। गुलदारों की बड़ी आबादी मोहंड की ओर शिफ्ट हुई है। इसका लाभ जंगल सफारी पर आ रहे पर्यटकों को मिल रहा है। पिछले एक महीने में हर रोज चार से पांच बार पर्यटकों को गुलदार नजर आ रहा है।
Iपर्यटकों की संख्या को देखते हुए सफारी वाहनों की संख्या में इजाफाI
राजाजी नेशनल पार्क के निदेशक कोको रोसे कहते हैं, मोहंड में पर्यटकों की संख्या में 40 प्रतिशत से अधिक का इजाफा हुआ है। पर्यटकों की संख्या को देखते हुए सफारी वाहनों की संख्या में इजाफा किया गया है। मोहंड के आसपास पर्यटकों के लिए बढ़ती सुविधाओं के कारण भी पर्यटकों का मोहंड क्षेत्र की ओर से सफारी में रुझान बढ़ा है। गुलदारों की बढ़ती संख्या के कारण पर्यटकों को लैपर्ड साइटिंग आसानी से हो रही है।
वन्यजीव विशेषज्ञ जीएस कुसारिया बताते हैं कि वेस्ट यूपी से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक के क्षेत्र में जितने ही गुलरार पकड़े जाते हैं, उन्हें मोहंड क्षेत्र में ही छोड़ा जाता है। इस कारण मोहंड में गुलदारों का कुनबा बढ़ा है। इस समय पतझड़ का मौसम है, गुलदारों के पास पेड़ों में छिपने की जगह कम है, इसलिए गुलदार आसानी से नजर आ रहे हैं।