- 50 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि हस्तांतरण समेत अनुमतियों को लेकर कमेटी करती है फैसला
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। राज्य में पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (सीया) और राज्य विशेष अंकन समिति (सीयाक) का गठन होने तक स्टैंडिंग कमेटी उससे जुड़े कामकाज देखेगी। वहीं, दोनों के गठन को लेकर भी नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की गई है।
राज्य में 50 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल में खनन किया जाना है, तो उसके लिए पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन कराया जाता है, जिसके बाद सीया अनुमति के संबंध में फैसला करती है। इसी तरह बड़े उद्योग, सड़क आदि के मामले भी सीया तक पहुंचते हैं। पर सीया, सीयाक के कार्यकाल की अवधि अक्तूबर-2025 में पूरी हो गई थी। इसके बाद नए सिरे से प्रक्रिया को शुरू किया गया, पर यह भी पूरी नहीं हो सकी। इससे कामकाज प्रभावित हो रहा था। अधिकारियों के मुताबिक ऐसी स्थिति अन्य जगहों पर आती रही होगी। ऐसे में मंत्रालय ने दोनों के गठन होने तक कामकाज देखने के लिए स्टैंडिंग कमेटी बनाने की व्यवस्था को लागू किया। इसके बाद राज्य मेें सीया के लिए स्टैंडिंग कमेटी बनाई गई है, जिसमें अध्यक्ष मुख्य सचिव, सदस्य व सदस्य सचिव क्रमश: पीसीसीएफ व अपर सचिव बने हैं। सीयाक की स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष प्रमुख सचिव रहेंगे। इसके अलावा पीसीबी सदस्य सचिव समेत तीन लोग इसके सदस्य बनाए गए हैं। यह कमेटी सीया और सीयाक के गठन होने कामकाज को देखेगी।
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गठन की प्रक्रिया शुरू
स्टैडिंग कमेटी बनी गई है, इसके साथ ही सीया, सीयाक के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राज्य पर्यावरण संरक्षण जलवायु परिवर्तन के निदेशक एसपी सुबुद्धि बताते हैं कि इसके लिए आवेदन मांगे गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक जो पिछली गठन की प्रक्रिया चल रही थी, उसे निरस्त कर दिया गया है। इसके अलावा मंत्रालय ने सीया, सीयाक के कार्यकाल आदि से जुड़े नियमों में बदलाव भी किया गया है। पहले इनका कार्यकाल तीन साल का होता था, जिसे चार साल कर दिया गया है।