दून मेडिकल कॉलेज, अस्पताल के यूरोलॉजी विभाग में मरीजों को अगर सर्जरी की जरूरत होती है, तो उन्हें जून तक की वेटिंग दी जा रही है। मरीज को समस्या आज है, लेकिन सर्जरी के लिए उन्हें तीन महीने बाद की तारीख दी रही है। इसकी बड़ी वजह है कि यूरोलॉजी विभाग को ओटी के लिए सप्ताह में सिर्फ एक दिन ही मिल रहा है। इसके अलावा एनेस्थेटिस्ट की कमी से भी मुश्किल हो रही है।
बता दें कि दून अस्पताल में यूरोलॉजी विभाग की ओपीडी सप्ताह में दो दिन सोमवार और बृहस्पतिवार को चलती है। मंगलवार ऑपरेशन थियेटर (ओटी) के लिए निर्धारित है। विभाग की एक दिन की ओपीडी में इलाज के लिए करीब 150 मरीज आते हैं, जिनमें से 10 से 15 मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत पड़ती है। वहीं, ओटी में एक दिन में चार से पांच मरीजों की सर्जरी ही हो पाती है। ऐसे में वेटिंग लिस्ट बढ़ती चली जाती है। पिछले दिनों दून अस्पताल में राजपुर रोड विधायक खजान दास ने समीक्षा बैठक की थी।
इसमें कहा था कि यूरोलॉजी विभाग में ओपीडी के दिन बढ़ाए जाएं। यूरोलॉजी की ओपीडी सप्ताह में तीन दिन की जाए। हालांकि, इस बात पर सहमति तो बनी, लेकिन अभी ओपीडी दो दिन ही चलाई जा रही है। अगर ओपीडी के दिन बढ़ाए जाते हैं तो वेटिंग लिस्ट और लंबी हो जाएगी।
छह दिन चली ओपीडी तो एक साल होगी वेटिंग
यूरोलॉजी विभाग के डॉक्टर का कहना है कि अगर यूरोलॉजी की ओपीडी सप्ताह में छह दिन चलेगी तो सर्जरी के लिए एक साल की वेटिंग मिलने लगेगी। क्योंकि, दो दिन की ओपीडी में तो सर्जरी के लिए तीन से चार महीने की वेटिंग दी जा रही है।
एनेस्थेटिस्ट के बिना नहीं चल सकती ओटी
दून अस्पताल के डिप्टी एमएस डॉ. धनंजय डोभाल ने बताया कि अस्पताल में 15 मेन ओटी हैं। ओटी का संचालन एनेस्थेटिस्ट के बिना संभव नहीं होता। अस्पताल में करीब 10 एनेस्थेटिस्ट हैं। हर ओटी में एक एनेस्थेटिस्ट की ड्यूटी लगाई जाती है।
तीन शिफ्ट में चलती है गायनी की ओटी
डॉ. डोभाल ने बताया कि गायनी की ओटी तीनों शिफ्ट में चलती है और तीनों शिफ्ट में एनेस्थेटिस्ट की मौजूदगी जरूरी होती है। इसके अलावा यूरोलॉजी में आमतौर पर बहुत इमरजेंसी केस नहीं होते हैं, जरूरत होती है तो तुरंत सर्जरी की जाती है। इसके अलावा जिस विभाग में जरूरत होगी वहां पर ओटी की संख्या बढ़ाई जाएगी।