देहरादून। उत्तराखंड को शिक्षा हब के रूप में विकसित करने और उच्च शिक्षा में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने वाले प्रायोजक निकाय की ओर से राज्य सरकार के पक्ष में जमा की जाने वाली स्थायी विन्यास निधि की व्यवस्था समाप्त होगी। धामी कैबिनेट ने इसके प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके लिए निजी विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन किया जाएगा।
कैबिनेट में आए प्रस्ताव के मुताबिक स्थायी विन्यास निधि की अनिवार्यता समाप्त होने से राज्य में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होगा और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा। एक्ट में संशोधन का उद्देश्य केवल निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा में नवाचार, अध्यापन और ज्ञानोपार्जन की नई पद्धतियों को प्रोत्साहित करना है। इसके साथ ही विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास, सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने और राज्य से जुड़े विषयों पर शोध को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। सरकार के प्रस्ताव में निजी विश्वविद्यालयों के माध्यम से रोजगार के संसाधन विकसित करने और प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की भी बात कही गई है।
रुड़की में दो नए निजी विश्वविद्यालय
हरिद्वार जिले के रुड़की में दो नए निजी विश्वविद्यालयों को उत्तराखंड निजी विश्वविद्यालय अधिनियम की अनुसूची-दो में शामिल किया जाएगा। इनमें आरोग्यम विश्वविद्यालय और बीएसएम विश्वविद्यालय शामिल हैं। इन दोनों विश्वविद्यालयों के शामिल होने के बाद प्रदेश में निजी उच्च शिक्षा संस्थानों का विस्तार होगा।