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‘स्मृति की खिड़की’ खुलते ही याद आएगा बीता हुआ कल

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‘स्मृति की खिड़की’ पुस्तक पढ़ते पाठकों को भी अपना बीता हुआ कल याद आने लगेगा। कहानीकार जितेंद्र शर्मा ने अपनी किताब के कुछ अंशों को पढ़ा तो श्रोता भी अपने बीते कल में देखने लगे।
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रोचक संस्मरणों पर आधारित कहानीकार जितेंद्र शर्मा की लिखी पुस्तक %स्मृति की खिड़की% का शनिवार को विमोचन हुआ। कहानीकार सुभाष पंत ने पुस्तक विमोचन के मौके पर कहा कि लेखक ने समाज में रिश्तों को व अपने समय को भावनात्मक बुनावट के साथ रचा है।पुस्तक के लेखक जितेंद्र शर्मा ने अपनी पुस्तक के कुछ अंश पढ़े और कहा किस्मृति की खिड़की को पढ़ते हुए शायद पाठकों को भी ये लगे कि वे अपने बीते हुए कल को देख रहे हैं। कवि व स्तंभकार राजेश सकलानी ने बताया कि लेखक की इस पुस्तक में तेरह रोचक संस्मरण हैं। जो रस्किन बॉन्ड, स्विट्जरलैंड का संन्यासी, कवि व कथाकार होशियार सिंह चौहान, टैरी मेरा हमदम व प्रोफ़ेसर वर्मा के साथ कुछ रंग आदि पर लिखे गए हैं।दिनेश चंद्र जोशी ने पुस्तक की समीक्षा करते हुए कहा कि ये संस्मरण अनूठे व विशिष्ट बन पड़े हैं। पुस्तक के संबंध में मदन शर्मा ,गुरदीप खुराना,कृष्णा खुराना ,संजय शर्मा, जितेन ठाकुर,दिनेश चंद्र जोशी,ललित मोहन रयाल ने भी विचार रखे। इस मौके पर प्रबोध उनियाल, राजेश सकलानी, सुषमा शर्मा, कुसुम भट्ट, श्याम प्रकाश, श्याम सिंह, श्याम अपूर्व शर्मा व शिवानी आदि उपस्थित रहे।
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