कृषि विज्ञान केंद्र में टमाटर के पौधों की कटिंग करते केंद्र प्रभारी डॉ. एके शर्मा।
- फोटो : VIKAS NAGAR
जल्द ही मैदानी इलाकों में लोग पुलम, खुमानी, चुल्लू, सेब, बादाम जैसी बागवानी फसलों की नर्सरी तैयार कर सकेंगे। इसके लिए इन दिनों कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के वैज्ञानिक नेट हाउस में प्रयोग कर रहे हैं। यदि प्रयोग सफल रहता है तो मैदानी इलाकों से भी पहाड़ी इलाकों में इन पौधों की सप्लाई की जा सकेगी।
पूरे राज्य में अब तक कहीं पर भी मैदानी इलाकों में पुलम, खुमानी, सेब, बादाम जैसी फसलों की पौध तैयार करने की सुविधा नहीं है। ऐसे में कृषि विज्ञान केंद्र ढकरानी के वैज्ञानिकों ने केंद्र में नेट हाउस तैयार किया है। इसमें इन दिनों चुल्लू के बीजों को बोया गया है। इसके बाद अगले चरण में वैज्ञानिक बादाम और सेब के बीजों को भी बोकर उनकी नर्सरी तैयार करेंगे। केंद्र के प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. एके शर्मा ने बताया कि मैदानी इलाकों में ठंडे इलाकों में होने वाले पुलम, खुमानी, सेब, बादाम की फसलों की पौध को जल्दी तैयार किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि आमतौर पर जहां इन फसलों की पौध तैयार होने में दो वर्ष लगते हैं। वहां मैदानी इलाकों में एक साल से भी कम समय में इन फसलों की पौध को तैयार किया जा सकता है। बताया कि यदि प्रयोग सफल रहता है तो क्षेत्र के काश्तकारों को पौध लगाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसे बेचकर काश्तकार अधिक मुनाफा कमा सकेंगे।
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टमाटर की पौध भी हो रही तैयार
केंद्र में वैज्ञानिक शीतोष्ण फलों की नर्सरी तैयार करने के साथ ही टमाटर की विभिन्न वैरायटी पर भी काम कर रहे हैं। क्षेत्रीय किसानों के टमाटर उत्पादन में इजाफा हो सके। इसके लिए वैज्ञानिकों ने महाराष्ट्र के साथ ही बंगलूरू से भी टमाटर की पौध मंगाई हैं। इसमें नवीन 2000, महाराष्ट्र हिमसोना और इंडम 13804 प्रजातियां प्रमुख हैं। इसमें इंडम प्रजाति के पौधों की ग्रोथ खासा अच्छी है।
कृषि विज्ञान केंद्र में बना नेट हाउस।- फोटो : VIKAS NAGAR