गन्ना किसान बाहुल्य विधानसभा डोईवाला में हर चुनाव में किसानों के मुद्दे गौण ही रहे। किसानों की सबसे बड़ी समस्या उनका गन्ना मूल्य भुगतान होता है। किसी भी सरकार ने इस मुद्दे पर कभी ठोस काम नहीं किया। नतीजा गन्ना किसानों की आवाज उपेक्षित होती चली गई।
डोईवाला में 90 साल पुरानी शुगर मिल है, जिसे किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं। सरकारीकरण होने के बाद गन्ना किसानों को सुुधार की बड़ी आस थी, लेकिन स्थिति में बहुत अधिक सुधार नहीं हो पाया। चूंकि गन्ना नकदी फसल है। इसके उत्पादन में क्षेत्र का किसान खासी रुचि रखता है। जानकारी के अनुसार 32 से 35 सौ हैक्टेयर गन्ना कमांड क्षेत्रफल है। गन्ना समिति डोईवाला से 8500 गन्ना किसान पंजीकृत हैं। इसमें से 5500 पूरी तरह से सक्रिय होकर हर साल मिल को गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं। विधानसभा क्षेत्र के काफी किसान देहरादून गन्ना समिति से भी जुड़े हुए हैं। केंद्रीय कृषि कानूनों के खिलाफ देश भर में किसानों के आंदोलन से डोईवाला के किसान भी जागरूक हुए। जागरूकता का असर यह है कि इस विधानसभा चुनाव के लिए किसान और उनके संगठन अपने अधिकारों को पाने के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं।
क्या कहते हैं किसान
विधानसभा में गन्ने की फसल किसानों की आय का प्रमुख जरिया है। अब तक की सभी सरकारों की कार्यशैली से गन्ना किसान उपेक्षित रहता है। जैसे गन्ना पेराई सत्र से पहले गन्ना मूल्य घोषित नहीं हो पाता है। किसान आंदोलन से किसान जागरूक और संगठित हुआ है। चुनाव के लिए किसान अपने हित सोच रहा है।
-ताजेंद्र सिंह, अध्यक्ष संयुक्त किसान मोर्चा
हमने हमेशा सरकारों से गन्ना किसानों को सहूलियत देने का अनुुुरोध किया है। विधानसभा क्षेत्र में गन्ना किसान एक ताकत है। अपनी इसी ताकत के बलबूते अपने अधिकार और समस्याओं का निदान करा सकते हैं। प्रमुख राजनीतिक दलों को गन्ना किसानों के मुद्दों को अपने घोषणा पत्र में प्राथमिकता के साथ रखना चाहिए।
-गुुलशन अरोड़ा, गन्ना किसान
गन्ना किसानों का चुनाव में हमेशा इस्तेमाल हुआ है, जिससे किसान विकास की मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाता है। ऐसी सरकार और ऐसा नुमाइंदा चाहिए जो गन्ना किसानों के हित के बारे में सोचता हो। अब गन्ना किसान जागरूक हो चुका है। विधानसभा चुनाव में अपने मत को अपने सहूलियत और अधिकार पाने के लिए उपयोग करेगा।
-सुरेंद्र खालसा, किसान धर्मूचक
गन्ना किसानों को अपनी आवाज उठाने का ढंग आ चुका है। सरकारों ने गन्ना किसानों को कभी भी प्राथमिकता नहीं दी। किसान अब नए सिरे से विचार कर रहा है। इस चुनाव में गन्ना किसान नए रूप में दिखाई देंगे।
-गुरदीप सिंह, किसान शेरगढ़