दून नगर निगम की पहली बोर्ड बैठक अब होली के बाद ही होगी। नगर निगम के मेयर सौरभ थपलियाल मार्च के प्रथम सप्ताह में जयपुर में होने वाली कार्यशाला में शामिल होने जा रहे हैं। मार्च माह में होली है, उधर स्वच्छता सर्वेक्षण भी चल रहा है। इसलिए अब नगर निगम होली के बाद पहली बोर्ड बैठक करने का मन बना चुका है।
उधर मेयर सौरभ थपलियाल ने नगर निगम के अहम मुद्दों काे लेकर सीएम पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। यह माना जा रहा है कि होली के बाद होने वाली पहली बोर्ड बैठक के रंग काफी चटख होंगे। बोर्ड की पहली बैठक को लेकर तैयारियां चल रही हैं, लेकिन अभी तक पहली बोर्ड बैठक हो नहीं पाई है। उधर तीन से पांच मार्च तक जयपुर में कार्यशाला का आयोजन है। इसमें जापानी दल भी प्रतिभाग करेगा, जापानी दल के सदस्य नगर निगमों के मेयर व पालिकाध्यक्षों को स्वच्छता से जुड़े टिप्स देंगे। उत्तराखंड से दून निगम के मेयर सौरभ थपलियाल के अलावा मसूरी पलिका की अध्यक्ष को कार्यशाला के लिए चुना गया है। कार्यशाला से लौटने के बाद होलाष्टक शुरू हो जाएगा। पहली बोर्ड बैठक को होलाष्टक में करने के लिए बोर्ड एकमत नहीं है, इसलिए अब बोर्ड बैठक होली के बाद ही होगी।
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Iसीएम से हुई कई मुद्दों पर गहन मंत्रणाI
मेयर सौरभ थपलियाल ने सीएम पुष्कर सिंह धामी से नगर निगम के कई मुद्दों को लेकर चर्चा की। इसमें शहर को स्वच्छ बनाने की रणनीति बनाने से लेकर पुराने मसलों पर भी चर्चा की गई। नगर निगम में अनुशासन व सरकार की सेवाओं का अधिकतम लाभ आमजन को पहुंचाने के लिए भी सीएम ने मेयर को कहा। मेयर ने सशक्त भू कानून लागू करने के लिए सीएम को बधाई दी।
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Iपुरानी कूड़ा कंपनी को बुलाया
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मेयर सौरभ थपलियाल ने कहा कि कूड़ा निस्तारण को लेकर निगम लगातार काम कर रहा है। शहर के ऐसे इलाकों को चिह्नित करने का काम चल रहा है, जहां कूड़ा गाड़ी नहीं पहुंचती है। ऐसे इलाकों की सूची बन रही है, जहां पर रोज कूड़ा गाड़ी नहीं जाती। रोज गाड़ियों के नहीं पहुंचने की वजह भी पता लगाई जा रही है। मेयर ने कहा, नई कंपनी के चयन का मामला कोर्ट में है। उन्होंने बताया कि पुरानी कंपनी को बुलाया है। उससे वार्ता की जाएगी, यह पूछा जाएगा कि आखिर ठीक तरह से कूड़ा निस्तारण क्यों नहीं किया जा रहा। आए दिन हड़ताल क्यों हो रही है। व्यवस्था को दुरस्त करने के लिए प्रयास किया जाएगा।
Iमेयर के गले की फांस बनी मोहल्ला स्वच्छता समिति
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पहली बोर्ड बैठक की राह में मोहल्ला स्वच्छता समिति की बड़ी फांस है। बोर्ड में चुनकर आए पुराने पार्षदों समेत राननीतिक धड़े का दबाव है कि जांच की फाइल को और नीचे दबा दिया जाए, ताकि पार्षदों पर कार्रवाई न हो सके, उधर अफसरों का भी फाइल को दबाने का पूरा दबाव है। लेकिन मेयर ने चुनाव के पहले यह वादा किया था कि अगर वह मेयर बने तो करोड़ों के इस फर्जीवाड़े में आरोपियों पर कार्रवाई कराएंगे। लेकिन अब यह फांस उनके लिए बड़ी चुनौती बन गई है। माना जा रहा है कि यह मामला भी पहली बोर्ड बैठक में उठेगा, इसलिए मेयर इस मर्ज का उपचार तलाश रहे हैं।