देहरादून। गढ़ी कैंट स्थित गोरखाली सुधार सभा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में दूसरे दिन शुकदेव के प्राकट्य और विदुर-मैत्रेय संवाद की लीला का वर्णन किया गया।
कथाव्यास नारायण प्रसाद आचार्य ने कहा कि जब राजा परीक्षित ने कलियुग को अपने राज्य में पांच स्थान यानी जुआ, मदिरा, व्यभिचार, हिंसा और स्वर्ण दिए तो कलियुग ने उनके सोने के मुकुट में प्रवेश कर लिया। इस दौरान कथा व्यास ने समझाया कि कैसे भगवान की भक्ति और संतों की संगति से अज्ञान का अंधकार दूर होता है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन अनमोल है, इसलिए मृत्यु के भय से डरने के बजाय भगवान के नाम का सुमिरन करना चाहिए। इसके बाद आरती कर भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर पदम सिंह थापा, रेमनाथ पौडेल, दुर्गेश गौतम, हरिहर गौतम, गोपाल, केशव आदि मौजूद रहे।