देहरादून। राजधानी के बीचो बीच से बहने वाली रिस्पना और बिंदाल नदियों के किनारे की अनाधिकृत बस्तियों को हटाना प्रशासनिक अधिकारियों के लिए चुनौती है। नदियों में बाढ़ की वजह से हर साल काफी नुकसान होता है। दो साल पूर्व बारिश के दौरान पुश्ता ढहने से दो लोगों की मौत हो गई थी।
ऐसे में सिंचाई विभाग ने एक माह पूर्व नोटिस जारी किया गया था, लेकिन यहां के लोगों पर कोई असर नहीं हो रहा है। नदियों के किनारे 30 से अधिक अनधिकृत बस्तियां हैं। बताया जा रहा कि राजनीतिक कारणों के चलते सिंचाई विभाग और निगम निगम के अधिकारी साहस नहीं जुटा पा रहे हैं।
बिंदाल नदी के किनारे की बस्तियां
बिंदाल नदी के किनारे चुक्खूवाला, विजय कॉलोनी, जोहड़ी गांव, पटेलनगर, चंद्रशेखर कॉलोनी, खुड़बुड़ा मोहल्ला, राजीवनगर, लोहियानगर, गांधीग्राम आदि कॉलोनियां हैं। यहां नदी के किनारे अनाधिकृत बस्तियों में हजारों लोग रहते हैं। इन लोगों को यदि समय रहते सुरक्षित स्थानों पर नहीं ले जाया गया तो बारिश में हादसा होने का डर है।
रिस्पना नदी के किनारे की बस्तियों
रिस्पना नदी के किनारे स्थित काठ बंगला, वीर गब्बर सिंह कॉलोनी, प्रेसिडेंट बॉडीगार्ड कॉलोनी, राजीवनगर, आर्यनगर, दीपक नगर, मोथरोवाला, महात्मा गांधी कॉलोनी, गुरु तेगबहादुर कॉलोनी, ऐसी कुछ ऐसी कालोनियां हैं जहां नदियों के किनारे अनाधिकृत तरीके से लोगों ने घर बना लिए हैं,। जो पूरी तरह से खतरे की जद में हैं।
नगर निगम ने चिह्नित किए थे 11,000 मकान
पूर्व में नगर निगम ने रिस्पना व बिंदाल नदियों के किनारे स्थित अवैध बस्तियों को चिह्नित करने के साथ ही सर्वे किया गया था। सर्वे में दोनों नदियों के किनारे कॉलोनियों में अवैध बस्तियों में करीब 11 हजार मकान बने होने की बात सामने आई थी। बाद में मामला सिर्फ सर्वे तक ही सीमित रह गया और नगर निगम व सिंचाई विभाग कुछ कार्रवाई नहीं कर सका।
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नदियों के किनारे स्थित बस्तियों के नियमितीकरण की प्रक्रिया जारी है। इस संबंध में नोटिफिकेशन भी जारी किया गया है। मानसून के दौरान लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की है।
-सुनील उनियाल गामा, मेयर