15 दिसंबर को मोदी की देहरादून में प्रस्तावित रैली से पहले केंद्र की ओर से उत्तराखंड को अलर्ट भेजा गया है। इसमें सिमी सहित तमाम आतंकी संगठनों के गड़बड़ी फैलाने की आशंका जताई गई है।
यही नहीं 12 आतंकियों के नाम और फोटो सहित तमाम डिटेल स्थानीय खुफिया एजेंसियों को भेजे गए हैं। इनके नेपाल बॉर्डर से घुसने की आशंका जताते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है।
कुछ समय पूर्व खूंखार आतंकी अब्दुल करीम टुंडा और यासीन भटकल के पकड़े जाने के बाद नेपाल बॉर्डर पर ज्यादा सतर्कता बरतने के निर्देश भी केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की ओर से लगातार दिए जा रहे हैं।
कई जानकारियां दी गईं
पुलिस सूत्रों के अनुसार पांच दिन पहले केंद्र सरकार की ओर से पुलिस मुख्यालय के माध्यम से राज्य के खुफिया विभाग को एक अलर्ट भेजा गया।
इसमें खूंखार आतंकी अहमद इब्राहीम, अयमान अल जवाहिरी, अबू मोहम्मद, मोहम्मद उली अहमदी, अहमद अब्दुल्लाह, अब्दुल रहमान यासीन, हकीमुल्लाह, जमाल सईद, जासिम फाद, जैबर इल्बनेह, सरवान मुस्तफा और जमाल सईद के नाम, फोटो, पते और अन्य जानकारियां दी गईं हैं।
खुफिया एजेंसियां सतर्क
इन आतंकियों को लेकर नेपाल बॉर्डर और अन्य जगहों पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। मोदी की रैली से ठीक पहले आए इस अलर्ट पर स्थानीय खुफिया एजेंसियां सतर्क हो गई हैं, क्योंकि ये सभी आतंकी कहीं न कहीं, सिमी (अलग-अलग नामों से), इंडियन मुजाहिदीन (आइएम), लश्कर-ए-तैयबा और आईएसआई जैसे संगठनों से जुड़े हैं। इन्हीं संगठनों से मोदी को खतरा है।
उत्तराखंड पुलिस, इंटेलीजेंस के पास नहीं आतंकी डाटा
15 दिसंबर को देहरादून में होने वाली मोदी रैली में सुरक्षा को लेकर पुख्ता इंतजाम की बात पुलिस कर रही है, लेकिन पुलिस और इंटेलीजेंस के पास इन संगठनों, उनसे जुड़े आतंकियों या स्लीपिंग मॉड्यूल्स के बारे में एक भी इनपुट या जानकारी नहीं है।
ऐसे में मोदी की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी केंद्रीय एजेंसियों पर है, जबकि लोकल पुलिस और इंटेलीजेंस का काम सिर्फ उनकी रैली में कानून-व्यवस्था बनाने तक सीमित होगा। पुलिस सूत्रों के अनुसार विभागीय अधिकारी ये बात भली-भांति जानते भी हैं।