उत्तराखंड की राजनीति की तरह ही अभी तक राज्यपाल का कार्यकाल भी खंडित ही रहा है। डॉ. अजीज कुरैशी राज्य के पांचवें राज्यपाल हैं जो अपना तय पांच साल का कार्यकाल पूरा करके नहीं गए हैं।
हालांकि अभी तक हुए पांच राज्यपालों ने उत्तराखंड को देश में अलग पहचान भी दी है। देश अन्य राज्यों से इतर इस छोटे नए राज्य ने सर्वधर्म समभाव की मिसाल पेश की है और यहां का राजभवन उसका गवाह बना है। यहां बारी-बारी सिख, हिंदू ईसाई और मुस्लिम राज्यपाल रहे हैं।
चौदह साल के उत्तराखंड को अब तक पांच राज्यपाल मिल चुके हैं। पहले राज्यपाल सुरजीत सिंह बरनाला करीब सवा दो साल रहने के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल होकर चले गए थे। दूसरे राज्यपाल सुदर्शन अग्रवाल ने सर्वाधिक करीब चार साल नौ महीने का कार्यकाल पूरा किया और सिक्कम के राज्यपाल होकर गए।
दिल्ली के उपराज्यपाल का कार्यकाल पूरा करके आए बीएल. जोशी उत्तराखंड में एक साल दस महीने ही रहे। यहां से उन्हें यूपी भेजा गया था। मार्ग्रेट अल्वा भी उत्तराखंड के राज्यपाल के तौर पर एक साल दस महीने ही यहां रहीं। उनके बिना कार्यकाल पूरा किए राजस्थान जाने के बाद ही डा. कुरैशी ने उनकी जगह ली थी।