इसके पहले भी प्रदेश में कई जगह मैगी के सैंपल फेल हुए थे।
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पूरे देश में पिछले सात माह से लंबे संघर्ष के बाद जैसे ही उत्तराखंड में मैगी को कुछ राहत मिली थी, वैसे ही अब फिर से नेस्ले के लिए बुरी खबर आई है।
वर्ष 2015 में मई और जून में जिला खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से लिए गए मैगी के दस-दस नमूनों में से सभी दस के दस फेल पाए गए हैं। राज्य खाद्य एवं औषधि विश्लेषण लैब की रिपोर्ट आने के बाद चार मामलों में विभाग की ओर से सीजेएम कोर्ट में वाद दायर कर दिया गया है, जबकि छह मामलों पर कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष सयाना ने बताया कि तत्कालीन जिलाधिकारी डॉ. पंकज पांडेय के निर्देशन में पिछले वर्ष मई और जून में मैगी के सैंपल लेने के निर्देश पर विभाग ने कार्रवाई की थी।