गंगोत्री घाटी में बर्फबारी के साथ ही तापमान शून्य से नीचे चले जाने पर भागीरथी की सहायक नदियों में पानी जम गया है। गंगोत्री में भागीरथी सिकुड़ गई है, जिससे गोमुख से लेकर गंगोत्री धाम तक भागीरथी नदी का प्रवाह बेहद कम हो गया है। नदी में वाटर डिस्चार्ज कम होने पर भागीरथी नदी पर बनी जल विद्युत परियोजनाओं के बिजली उत्पादन पर भी असर पड़ा है।
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Gangotri Dham
- फोटो : AmarUjala
दिसंबर माह तक गंगोत्री घाटी में बर्फबारी के साथ तापमान शून्य से नीचे चला जाता है, जिससे नदियों का पानी जमकर बर्फ बन जाता है। इस बार गंगोत्री धाम में जनवरी के शुरूआत में ठीकठाक बर्फबारी हुई।
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Snowfall in Gangotri
- फोटो : AmarUjala
तापमान घटने पर भागीरथी की सहायक नदियां रुद्रगैरा, केदारगंगा, सियागाड़, जालंधरी गाड़, ककोड़ा गाड़ आदि में पानी बर्फ बन गया। इससे इन सहायक नदियों का प्रवाह ही रुक गया है।
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snowfall in gangotri
- फोटो : AmarUjala
गंगोत्री धाम जाने पर पता चला कि यहां भागीरथी नदी का पानी आधा बर्फ बन गया और नदी में सिकुड़न आने से जल प्रवाह भी कम हो गया। गंगोत्री धाम में रह रहे कुछ साधु संत विकट परिस्थिति में रहकर नदियों में जमे पानी को गर्म करके पी रहे हैं। सहायक नदियां जमने से उपला टकनौर के निचले इलाकों में पेयजल संकट गहराने के आसार हैं।
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Maneri Bhali project
- फोटो : amarujala
वहीं, भागीरथी में वाटर डिस्चार्ज कम होने पर मनेरी भाली प्रथम व द्वितीय परियोजना में उत्पादन प्रभावित हुआ है। दोनों परियोजनाओं में एक मशीन से प्रतिदिन 1.2 मीलियन यूनिट तक बिजली उत्पादन हो रहा है। जबकि नदी में वाटर डिस्चार्ज घटकर 25 से 30 क्यूमेक्स हो गया।
हालांकि मनेरी भाली परियोजना द्वितीय चरण के ईई राजीव चौगसे का कहना है कि परियोजनाओं में बिजली उत्पादन विंटर सीजन में कम ही होता है। नदियों का वाटर डिस्चार्ज लेवल भी बेहद कम हो चुका है। आने वाले समय में उत्पादन में गिरावट आने की संभावना है।