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इस मैदान से होकर जाता है टिहरी की जीत का रास्ता

Tue, 22 Apr 2014 12:56 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
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टिहरी लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर में देहरादून जनपद के मैदानी क्षेत्रों के वोट बेहद अहम हैं।
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लोकसभा सीट के 60 फीसदी मतदाता विधानसभा क्षेत्र सहसपुर, विकासनगर, कैंट, मसूरी, राजपुर, रायपुर में हैं, जिसमें भाजपा कांग्रेस के पास तीन तीन विधायक हैं।

2012 में भाजपा ने इन सीटों पर भारी बढ़त ली थी, जिससे माला राज्यलक्ष्मी की जीत सुनिश्चित हुई।

दोनों के खिलाफ है एंटीइनकम्बेंसी

कांग्रेस प्रत्याशी साकेत बहुगुणा के पिता पूर्व मुख्यमंत्री है जबकि भाजपा प्रत्याशी माला राज्यलक्ष्मी शाह मौजूदा सांसद हैं जिससे दोनों को एंटीइनकम्बेंसी झेलनी पड़ रही है।

2012 के टिहरी उपचुनाव में साकेत बहुगुणा 22 हजार मतों से माला राज्यलक्ष्मी शाह से हार गए थे। उस दौरान उनके पिता विजय बहुगुणा राज्य के मुख्यमंत्री थे।

इस बार मैदानी क्षेत्रों में सांसद माला को कांग्रेस उनके 18 माह के कार्यकाल पर घेर रही है, लेकिन भाजपा को मोदी लहर के साथ मजबूत संगठन पर भरोसा है।

ये वोट बदल सकते हैं तस्वीर

मैदानी क्षेत्रों में मुस्लिम, गोरखा और कुछ प्रतिशत पंजाबी समुदाय का है जो बेहद अहम हैं। इसके अलावा पूर्व सैनिकों की लगभग 22 हजार मत शहरी विधानसभा क्षेत्रों में है।

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इस बार चुनाव में आम आदमी पार्टी की शहरी मतों में सेंध मार रही है। आप की पैठ पूर्व अधिकारियों के साथ कर्मचारियों में बढ़ रही है, जो शहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मौजूद हैं।

इसके साथ रालोद, पीस पार्टी, बसपा, उक्रांद, सहित एक दर्जन अन्य और निर्दलीय भी चुनाव में हैं।

मुस्लिम समीकरण है अहम

टिहरी विधानसभा की सहसपुर और विकासनगर विधानसभा क्षेत्र में 20 से 25 फीसदी आबादी मुस्लिम है। इसके अलावा शहर में 10 फीसदी मुस्लिम मतदाता है।

भाजपा को छोड़कर कांग्रेस व अन्य दलों के लिए मुस्लिम मतदाता सबसे अहम है। 2012 के उपचुनाव में मुस्लिम मतदाताओं को कांग्रेस संगठन मतदाता केंद्रों से नहीं पहुंचा पाए, जिसे साकेत की हार का बड़ा कारण माना गया है।

वहीं भाजपा को देहरादून निकाय चुनाव में कुछ मुस्लिम मत मिल चुके हैं, जिससे उनकी नजर भी रहेगी।
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गोरखा समुदाय पर है सबकी नजर

गोरखा समुदाय का बड़ा वोट बैंक मसूरी विधानसभा क्षेत्र में हैं। इसके अलावा छुटपुट मतदाता शहर की कई अन्य सीटों पर हैं। भाजपा प्रत्याशी माला राज्यलक्ष्मी का नेपाली मूल होने का फायदा 2012 उपचुनाव में मिला, लेकिन इस बार स्थिति बदली है।

पंजाबी समुदाय भी अहम
पंजाबी समुदाय का बड़ा वोट बैंक कैंट विधानसभा सीट पर है, जिसका फायदा वहां के मौजूदा विधायक हरबंस कपूर लेते रहे हैं। कपूर टिहरी सीट के लोकसभा पालक हैं, जिनके निर्देश में चुनाव प्रचार चल रहा है। कांग्रेस के पास इस क्षेत्र में कोई बड़ा पंजाबी नेता नहीं है।

हालांकि इस बार रालोद के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले पंजाबी समुदाय के जपेंद्र सिंह इस बार भी यहां पंजाबी मतदाताओं में सेंध मारेंगे।
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