सीएम ने प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर बसाए गए टिहरी विस्थापितों को भूमि का मालिकाना अधिकार देने के लिए सभी विधिक पहलुओं को देखते हुए जल्द से जल्द इसका भूमिधरी अधिकार दिया जाने को कहा है।
सोमवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में पशुलोक, सितारगंज के अलावा ऋषिकेश व हरिद्वार के पथरी आदि स्थानों से बसाए गए विस्थापित और राजाजी नेशनल पार्क से दूसरे स्थानों पर बसाए गए गुर्जरों को मालिकाना हक देने के लिए गहन विचार-विमर्श किया गया।
ऋषिकेश में 1150 टिहरी विस्थापितों को 680 हेक्टेयर और हरिद्वार के पथरी में 3580 हेक्टेयर भूमि दी गई है। इसके अतिरिक्त कुछ भूमि अवस्थापना सुविधाएं जैसे स्कूल, कालेज, अस्पताल आदि के लिए भी आवंटित की जा चुकी है।
मगर आवंटन के बाद भूमिधरी का अधिकार देने में वन विभाग की ओर से पेंच फंसा हुआ था। सारी दिक्कतें दूर होने के बाद अब भूमिधरी का अधिकार जल्द से जल्द दिए जाने की बात मुख्यमंत्री ने सचिवालय में आयोजित बैठक में कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न कारणों से अपने मूल स्थानों से हटाकर दूसरे स्थानों पर बसाए गए विस्थापितों को भूमि का मालिकाना हक दिया जाना आवश्यक है।
कल्याणपुर के विस्थापितों को भी मिलेगा मालिकाना हक
हरीश रावत
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इसके अभाव में आने वाले समय में भूस्वामित्व संबंधी विवाद बढ़ते जाएंगे। उन्होंने निर्देश दिए कि पशुलोक में बसे टिहरी विस्थापितों को मालिकाना हक देने के लिए विधिक राय लेते हुए आवश्यक प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू कर दी जाए। तय किया गया कि वन विभाग 15 दिनों में इसका डिनोटिफिकेशन जारी करेगा।
इसके बाद राजस्व विभाग इसे राजस्व ग्राम घोषित करने की प्रक्रिया अगले 15 दिनों में कर देगा। सितारगंज के कल्याणपुर में बसे विस्थापितों को मालिकाना हक देने के लिए राजस्व विभाग विधिक परामर्श लेकर 15 दिनों में शासन को प्रस्ताव भेजेगा। राजाजी नेशनल पार्क के विस्थापित गुर्जर पथरी और सबलगढ़ में बसाए गए हैं। पथरी और सबलगढ़ में वन विभाग को इसका डिनोटिफिकेशन करना होगा।
बिंदुखत्ता में बसे लोगों को किस प्रकार मालिकाना हक दिया जा सकता है, इसकी सभी संभावनाओं का अध्ययन करने के लिए अपर सचिव राजस्व, अपर सचिव विधि और अपर सचिव वन की तीन सदस्यीय समिति बनाने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह, सचिव अमित नेगी, सचिव आनंदवर्धन, डीएस गर्ब्याल, प्रमुख वन संरक्षक आरके महाजन आदि अधिकारी प्रमुख रूप से मौजूद रहे