हालांकि टीम लीडर दीपक राणा के नेतृत्व में सारिका पाटिल, अंकुल सिंह, सुरेश शेरपा, एसडीआरएफ के सुनील कुमार एवं गबर सिंह नेगी तथा गंगोत्री नेशनल पार्क के देवराज राणा ने 22 सितंबर को गंगोत्री से अपना अभियान शुरू किया।
अभियान दल भोजवासा, गोमुख होते हुए 23 सितंबर को तपोवन पहुंचा। यहां से शिवलिंग पीक के बायीं ओर से ट्रेकिंग शुरू कर दल के सदस्य अगले दिन कीर्ति ग्लेशियर पहुंचे। यहां 700 मीटर ऊंची आइस वॉल परिक्रमा पथ का सबसे दुर्गम हिस्सा साबित हुई।
दल में शामिल दीपक राणा, अंकुल सिंह एवं सुरेश शेरपा ने इस चुनौती को तोड़कर आगे कदम बढ़ाए, जबकि दल के शेष सदस्य मेरू ग्लेशियर से होते हुए इस आइस वॉल के दूसरे छोर पर पहुंचे। यहां से यही टीम मेरू ग्लेशियर से होते हुए 28 सितंबर को तपोवन लौटी।
शिवलिंग परिक्रमा अभियान के दौरान जुटाए गए आंकड़ों, रूट मैप आदि जानकारियों का संकलन कर एक पुस्तिका तैयार की जाएगी, ताकि रोमांच के शौकीन देश-विदेश के पर्यटकों को इसकी जानकारी मुहैया कराकर उन्हें इस ओर आकर्षित किया जा सके। इस परिक्रमा पथ के खुलने से जिले में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
-प्रकाश खत्री, जिला पर्यटन अधिकारी उत्तरकाशी।