बाद में जारी हुए शासनादेशों में वेतन निर्धारण को लेकर संशय उठ खड़ा हुआ। यह साफ नहीं हो रहा था कि इन शिक्षकों को उच्चीकृत वेतनमान एक जुलाई 2006 से मिलेगा या उच्चीकृत वेतनमान में वेतन निर्धारण के बाद एक वर्ष बाद से देय होगा।
अब वित्त विभाग ने साफ कर दिया है कि वेतन निर्धारण होने पर वार्षिक वेतन वृद्धि जनवरी 2006 या जुलाई 2006 से होगी। यह साफ होने से उन शिक्षकों को भी राहत मिली है, जिनके ऊपर अधिक वेतन वृद्धि के नाम पर वसूली की तलवार लटकी हुई थी। शिक्षा विभाग ने प्रत्येक जिले में इस तरह के शिक्षकों से वेतन वसूली शुरू तक कर दी थी।
इसी तरह वित्त ने यह साफ कर दिया है कि पदोन्नति के पदों पर ग्रेड वेतन के सापेक्ष न्यूनतम वेतन से कम निर्धारण होने पर भी समकक्ष ग्रेेड वेतन में न्यूनतम वेतन दिया जाएगा। सीधी भर्ती या पदोन्नति दोनों तरह से नियुक्ति वाले पदों पर न्यूनतम वेतन से कम मिलने पर पदोन्नति की तिथि से नोशनल और 18 दिसंबर 2018 से वास्तविक लाभ दिया जाएगा।
राजकीय शिक्षक संघ पिछले 10 साल से इस बात के लिए संघर्ष करते आ रहे हैं। यह दोनों आदेश होने से करीब छह हजार शिक्षकों को किसी न किसी रूप में फायदा होगा। सबसे बड़ी बात यह है कि शिक्षकों को वसूली के डर से निजात मिलेगी।
- सोहन सिंह माझिला, प्रांतीय महामंत्री, राजकीय शिक्षक संघ