उत्तराखंड के राजकीय महाविद्यालयों में संविदा पर कार्यरत 423 शिक्षकों को तदर्थ करने के सरकार के फैसले पर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रदेश के नेट और सेट क्वालीफाई अभ्यर्थी इस निर्णय को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में हैं।
नियमों के दायरे में नही
सोमवार को गांधी पार्क में आयोजित बैठक में नेट और सेट क्वालीफाई युवाओं ने कहा कि जिन संविदा शिक्षकों को सरकार तदर्थ कर रही है, वे यूजीसी और राज्य सरकार के बनाए नियमों के दायरे में नहीं आते हैं।
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उन्होंने कहा कि इनमें 366 सामान्य श्रेणी के प्रवक्ता हैं, जबकि इनकी संख्या 285 होनी चाहिए थी। दूसरी ओर आरक्षण मानकों के मुताबिक 126 अनुसूचित जाति, 56 ओबीसी और 19 पद एसटी के होने चाहिए थे लेकिन ये क्रमश: 29, 23 और पांच हैं।
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यूजीसी रेगुलेशन 2009 के मुताबिक डिग्री कालेज प्रवक्ता के लिए अभ्यर्थी का यूजीसी नेट या स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट (सेट) पास होना अनिवार्य है। जबकि इन तदर्थ होने वाले शिक्षकों में से कुछ को छोड़कर बाकी के पास यह योग्यता नहीं है।
बैठक में डा. वीएम गौड़, परवीन लखेड़ा, दिवाकर बौधा, दयाधर सेमवाल, रायवीर चौहान, नवीन, जगदीश पांडे, सुमन प्रकाश, मनीष मिश्रा, देवेंद्र सिंह, नीतेश बौंठियाल आदि मौजूद रहे।
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