उत्तराखंड में अभी तक तो पहाड़ के सरकारी स्कूलों में शिक्षक न होने का रोना था लेकिन आश्चर्य की बात है कि प्रदेश का मैदानी जिला हरिद्वार भी इससे अछूता नहीं हैं।
यहां के 20 स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं। स्कूल का ताला खोलने के लिए शिक्षा विभाग ने इधर-उधर से एक-एक शिक्षक की अस्थायी व्यवस्था कर रखी है।
1058 बच्चों का भविष्य खतरे में
ग्रामीण क्षेत्र के 16 और शहरी क्षेत्र के चार स्कूलों की ऐसी ही हालत है। इनमें पढ़ने वाले 1058 बच्चों के भविष्य पर सरकारी सिस्टम का ग्रहण लगा हुआ है।
सरकार ने इन स्कूलों में आसपास के विद्यालयों से एक-एक शिक्षक की ड्यूटी लगा रखी है। जो सुबह ताला खोलने के बाद दिनभर सारी कक्षाओं के बच्चों को एक साथ बैठाकर बहलाने का काम भी करते हैं।
जैसे-तैसे चल रही व्यवस्था
इसके अतिरिक्त 67 स्कूल ऐसे हैं जिनमें एक-एक शिक्षक ही तैनात है। शिक्षक के छुट्टी जाने, बीमार पड़ने और विभागीय काम के चलते बाहर जाने पर इन स्कूलों में ताला लगा दिया जाता है।
जहां एक से अधिक शिक्षक हैं, वहां से शिक्षकविहीन स्कूलों में भेजकर जैसे-तैसे व्यवस्था चल रही है। मामला शासन के संज्ञान में हैं। नई नियुक्तियों के बाद स्थिति में सुधार हो पाएगा।
- जगमोहन सोनी, जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक, हरिद्वार