शिक्षकों से बच्चों को पढ़ाने के अलावा अन्य कोई काम न लिए जाने की शिक्षा मंत्री की घोषणा के बाद भी शासनादेश को ताक पर रखकर कुछ शिक्षक सीआरपी, बीआरपी का काम देख रहे हैं। यह हाल तब है जबकि हाल ही में शिक्षा महानिदेशक बंशीधर तिवारी ने भी इस तरह के शिक्षकों को मूल तैनाती पर भेजने का आदेश दिया था।
शिक्षा मंत्री डा. धन सिंह रावत के मुताबिक शिक्षकों से बच्चों को पढ़ाने के अलावा कोई काम नहीं लिया जाएगा। यही वजह है कि स्कूलों में विभिन्न कार्यों को ऑनलाइन किया जाएगा। जबकि सीआरपी, बीआरपी के करीब एक हजार पदों को आउटसोर्स के माध्यम से भरा जाएगा, लेकिन प्रदेश के देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर सहित कुछ जिलों में शिक्षकों से सीआरपी, बीआरपी का काम लिया जा रहा है।
यह हाल तब है जबकि 19 जुलाई 2022 को शिक्षा महानिदेशक ने समस्त सीईओ को दिए आदेश में कहा था कि संज्ञान में आया है कि कुछ जिलों में शिक्षकों से शिक्षण कार्य के स्थान पर बीआरपी, सीआरपी काम काम लिया जा रहा है। इससे संबंधित स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है।
आदेश में कहा गया है कि वर्ष 2018 के शासनादेश में स्पष्ट किया गया है कि बीआरपी का कार्य संबंधित उप शिक्षा अधिकारी एवं सीआरपी का कार्यदायित्व पास के स्कूलों के प्रधानाध्यापक से पठन-पाठन के अलावा अतिरिक्त प्रभार के रूप में लिया जाएगा। इसके बाद भी कुछ जिलों में शिक्षक स्कूल छोड़कर बीआरपी, सीआरपी का काम कर रहे हैं।
समस्त सीईओ को जारी आदेश में कहा गया कि जिलों में यदि उनकी ओर से शिक्षकों से सीआरपी, बीआरपी का काम लिए जाने की व्यवस्था बनाई गई है तो संबंधित की मूल स्कूल में तैनाती की जाए। इस तरह का मामला पकड़ में आने पर संबंधित जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। हैरानी की बात यह है कि महानिदेशक के इस आदेश के बाद भी शिक्षक सीआरपी, बीआरपी का काम देख रहे हैं, लेकिन अब तक किसी भी सीईओ के खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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सीआरपी का काम प्रधानाध्यापक और बीआरपी का प्रभार उप शिक्षा अधिकारी के पास है। अगले महीने से हम इसका काम आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से कराने जा रहे हैं।
- बंशीधर तिवारी, शिक्षा महानिदेशक