दुनिया की सबसे ऊंची सात चोटियों के बाद दक्षिणी ध्रुव पर कदमों के निशान छोड़ चुकीं जुड़वा बहनों ताशी और नुंग्शी का अगला लक्ष्य उत्तरी ध्रुव है।
अभियान का अगला पड़ाव उत्तरी ध्रुव
उत्तराखंड की बहादुर बेटियां मुश्किलों भरे इस सफर की शुरुआत अप्रैल में करेंगी। इसी के बाद उनका ‘ऊंचाईयों से आगे दुनिया की हदों तक’ अभियान पूरा होगा।
देहरादून में जोहड़ी गांव निवासी ताशी और नुंग्शी 115 किलोमीटर स्कीइंग करते हुए 28 दिसंबर को दक्षिणी ध्रुव पहुंची थीं। अभियान का अगला पड़ाव उत्तरी ध्रुव है। पिता वीके मलिक बताते हैं कि 13 जनवरी को बेटियों के देहरादून पहुंचने पर जश्न मनाया जाएगा।
एक महीने के आराम के बाद दोनों को 12 फरवरी को न्यूजीलैंड-भारत स्पोर्ट्स स्कॉलरशिप के तहत स्पोर्ट्स एंड एक्सरसाइज विषय पर उच्च शिक्षा के लिए न्यूजीलैंड जाना है। हालांकि, न्यूजीलैंड के विश्वविद्यालय ने इस अभियान के लिए दोनों की छुट्टी मंजूर कर ली है। हालांकि, अभियान में असल समस्या खर्चे की है।
वीके मलिक ने बताया कि उत्तरी ध्रुव जाने के लिए दोनों बहनों को फीस के रूप में 63 लाख रुपए देने होंगे। जबकि बाकी व्यवस्थाओं के लिए करीब सात लाख रुपए और चाहिए।
दोनों बहनों ने अभ्यास के लिए साउथ न्यूजीलैंड के माउंट कुक का चयन किया है। यहां वे स्कीइंग का अभ्यास कर सकेंगी। उत्तरी ध्रुव के अंतिम सिरे तक पहुंचने के लिए दोनों बहनों को 115 किलोमीटर स्कीइंग करनी पड़ेगी।