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ताशी-नुंग्शी ने फतह किया 'माउंटेन आफ डेथ'

Sun, 09 Feb 2014 04:00 PM IST
प्रवेश कुमारी/अमर उजाला, देहरादून
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माउंट अकांकागुआ से जुड़े कुछ आंकड़े डराने वाले थे। मसलन हर सीजन में यहां नौ मौत औसतन होती हैं। हाई डेथ रेट की वजह से इसे ‘माउंटेन आफ डेथ’ भी कहा जाता है।
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ऐसे में जब बर्फ पर दो युवा पर्वतारोहियों फ्रांसिस और जैरोड के शव देखे तो दिल बैठ सा गया। उस पर हवा इतनी तेज चल रही थी कि खड़े तक होना मुश्किल लग रहा था। ऐसे हालात में  पहली बार लगा कि वापस लौट जाएं।

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लेकिन फिर मम्मी, डैडी के चेहरे याद आए तो एक-दूसरे को हाथ पकड़ हौसला दिया। आखिर जद्दोजहद के बाद ‘माउंटेन आफ डेथ’ फतह किया।

दो अमरीकियों की हो गई थी मौत

इन बहनों के मुताबिक मरने वाले दो अमेरिकी पर्वतारोही थे। पेनसिल्वेनिया का 28 साल का फ्रांसिस कीनन और विस्कांसिन का जैरोड वान यूडेन। अर्जेंटीनी हेलीकाप्टर की मदद से 650 फुट गहरी खाई से इनके शव बरामद किए गए थे।

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एक तरफ हौसला मात खा रहा था, उस पर मौसम के हालात इतने बुरे थे कि एक कदम बढ़ाना भी दूभर हो रहा था। टैंट पर इस कदर ओस गिर रही थी कि सिर तक गीला हो गया था।

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एक-एक कदम बढ़ाना मुश्किल था। ऐसे में साथियों ने भी हिम्मत बढ़ाई। सबसे बड़ी खुशी का क्षण वह था, जब माउंट अकांकागुआ पर कदम पड़े।

टीम में सबसे छोटी थीं मलिक बहनें

केवल 22 साल की जुड़वां बहनें ताशी, नुंग्शी पांच लोगों की टीम में सबसे छोटी पर्वतारोही थीं। इसमें दो पर्वतारोही अर्जेंटीना के थे, जबकि एक आयरलैंड का था। इनकी उम्र क्रमश: 30, 50 और 56 साल की थी।

पहाड़ों को नापा, अब दम-खम का परीक्षण
ऊंचे पहाड़ों को नापने वाली ताशी, नुंग्शी बहनें आने वाली 11 मार्च से एक नए अभियान पर होंगी।

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यह एंड्यूरेंस यानी दम-खम का परीक्षण होगा। आयरलैंड में तकरीबन 35 किलोमीटर का पैदल सफर वह भी विषम भौगोलिक परिस्थिति में।

पिता ने जेब से लगाए एक लाख

अभियान खासा खर्चीला था। इसके लिए आठ लाख की मदद आदित्य बिरला ग्रुप ने दी थी, जबकि एक लाख रुपये पिता कर्नल वीरेंद्र सिंह मलिक ने अपनी जेब से लगाए। ओएनजीसी ने अभी पांच लाख रुपये की मदद का भरोसा दिलाया है।

परिचितों का जमघट लगा
ताशी, नुंग्शी के जोहड़ी गांव स्थित आवास पर उनकी कामयाबी का जश्न मनाने मित्रों, परिचितों का जमघट लगा था।

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हर आने वाले का स्वागत मिठाई से किया जा रहा था। पिता वीरेंद्र मलिक और मां अंजु मलिक की खुशी का ठिकाना न था।
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बेटी बचाने को चढ़ रहीं पहाड़

ताशी, नुंग्शी बेटी बचाने के लिए यह पहाड़ चढ़ रही हैं। ‘मिशन ट्विन सिस्टर्स एट टाप सेवन सम्मिट्स’ लिंग समानता और कन्या भ्रूण हत्या को समर्पित है। इसमें से चार पहाड़ यह जुड़वां बहनें फतह कर चुकी हैं। अब तीन पहाड़ और जीतने बाकी हैं।

अभी जीते यह पहाड़
माउंट एवरेस्ट (नेपाल)माउंट एल्ब्रुस (यूरोप)माउंट किलिमंजारो (अफ्रीका)माउंट अकांकागुआ (दक्षिण अमेरिका)
जीतने बाकी यह पर्वत
माउंट विंसन मैसिफ (अंटार्कटिका)माउंट मैकिन्ले (उत्तरी अमेरिका)माउंट कार्स्टेंज पिरामिड (आस्ट्रेलिया)
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