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22 साल में तीन बार बदला नाम पर सड़क का वही हाल

Wed, 30 Jul 2014 03:43 PM IST
चंद्रशेखर जोशी/ अमर उजाला, चंपावत
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चीन की सीमा को सैनिक साज सामान ले जाने वाला बेहद संवेदनशील और सामरिक महत्व का टनकपुर-पिथौरागढ़ राजमार्ग 22 साल में भी मुकम्मल नहीं हो पाया है, हालांकि इस दौरान इसके तीन नाम बदल गए।
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सड़क की हालत बयान करने लायक भी नहीं
150 किमी की ये सड़क कहीं चौड़ी नहीं हुई है तो कहीं दलदल बने हुए हैं। दस साल पहले इसे पिथौरागढ़ से तवाघाट तक बढ़ाया गया लेकिन इसकी हालत तो बयान करने लायक भी नहीं है।

इसके आगे अभी लिपुुलेख तक बनना है और उसका अंदाज आप खुद लगा सकते हैं।

खीझे हुए व्यापारियों ने अति होने पर दो अगस्त को तवाघाट तक इस सड़क को बनाने के जिम्मेदार बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) के खिलाफ बंद रखना तय किया है। बीआरओ इस मामले में प्रशासन को ही जवाब नहीं देता, मीडिया तो दूर की बात है।
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1992 में धौलीगंगा बिजली परियोजना निर्माण के लिए भारी मशीनरी को ले जाने के मकसद से एनएच को चौड़ा करने का काम शुरू किया गया था। परियोजना तो वर्षों पूर्व पूरी हो गई मगर रोड की हालत में बहुत सुधार नहीं हुआ।

कुछ जगहों पर रोड चौड़ी और डामर युक्त हुई, लेकिन टनकपुर से पिथौरागढ़ तक अलग-अलग पैच में करीब 30 किमी रोड के बुरे हाल ही नहीं है खतरनाक भी हैं।

इस मार्ग पर सफर करना अब भी दहशत भरा
चंपावत जिले में धौन से गुमोद तक 40 किमी सड़क की चौड़ाई करीब चार मीटर है, जिसे सात मीटर किया जाना है, लेकिन यह काम भी पूरा नहीं हो सका है। एनएच नौ के नाम के इस महत्वपूर्ण मार्ग में सफर अब भी दहशत पैदा करता है।

खासकर, बरसात में दलदल और मलबा भर जाता है। पिछले सप्ताह हुई बारिश ने भी धौन, स्वांला और चल्थी सहित कई जगह रोड पर यातायात खतरनाक बना दिया है। इस दौरान तीन दिन यातायात अस्त-व्यस्त रहा।

दिलचस्प बात ये है कि सड़क चाहे जिस हाल में हो, अब तक उसके तीन बार नामकरण हो चुके हैं। उत्तर प्रदेश में यह मार्ग नंबर 29 राजमार्ग के नाम से जाना जाता था।

फिर केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री के रूप में बीसी खंडू़ड़ी के दौर में इसे एनएच 125 नंबर नाम दिया गया और अब चार साल पूर्व इसे एनएच नंबर नौ कर दिया गया।

बीआरओ की कार्यप्रणाली एकदम लचर है। कई बार शिकायत करने के बाद भी इस एजेंसी ने सुधार नहीं किया है। वे टनकपुर-तवाघाट एनएच की इस एजेंसी को बदलकर एनएच, सीपीडब्लूडी अथवा किसी अन्य एजेंसी से कराने की मांग मुख्यमंत्री से करेंगे।
- हेमेश खर्कवाल, दर्जा कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड

बीआरओ के काम का ढर्रा जन सरोकारी नहीं रहा है। रोड के हाल भी कई जगह ठीक नहीं है। एनएच ने अगर अपने काम में सुधार नहीं किया तो इसे बदलने के लिए केंद्र की भाजपा सरकार से पहल की जाएगी।
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- पूरन सिंह फर्त्याल, विधायक, लोहाघाट
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