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अब उत्तराखंड में होगी स्वाइन फ्लू की जांच

Sun, 18 Oct 2015 12:00 PM IST
अनिल चंदोला/ अमर उजाला, देहरादून
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स्वाइन फ्लू, बच्चों के दिमागी बुखार, बर्ड फ्लू और रेबीज समेत तमाम गंभीर बीमारियों की जांच अब उत्तराखंड में ही होगी।
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अभी तक इन गंभीर बीमारियों की जांच के सैंपल दूसरे राज्य भेजने पड़ते थे। इससे मरीजों को खासा लाभ होगा क्योंकि जल्दी रिपोर्ट मिलने पर उनका समय से उपचार हो सकेगा। श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में यह लैब तैयार हो गई है।

सोमवार को प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी उत्तराखंड की पहली बायो सेफ्टी लेवल (बीएसएल)-थ्री सुविधा युक्त मोलिक्यूलर डायग्नोस्टिक लैबोरेटरी का श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में उद्घाटन करेंगे। डीएनए और आरएनए के जरिए बीमारियां पैदा करने वाले वायरस की अब प्रदेश में ही पहचान हो सकेगी।
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लैब खुलने के बाद सैंपल दूसरे राज्यों को भेजने और जांच रिपोर्ट के लिए इंतजार करने के झंझट से मुक्ति मिल सकेगी। लैब खुलने के बाद तमाम गंभीर बीमारियों के सैंपल की जांच प्रदेश में ही की जा सकेगी।

24 घंटे में मिलेगी रिपोर्ट
स्वाइन फ्लू समेत तमाम गंभीर बीमारियों की जांच रिपोर्ट 24 घंटे में मिल जाएगी। अभी इनकी जांच रिपोर्ट दिल्ली से तैयार होकर आती है। इसके लिए पहले डिस्ट्रिक सेंटर पर सभी सैंपल एकत्रित किए जाते हैं। यहां से सैंपल जांच के लिए दिल्ली भेजे जाते हैं। इस प्रक्रिया में एक हफ्ते लग जाते हैं।

कई बार सैंपल की जांच रिपोर्ट जब तक आती है, तब तक मरीज की हालत या तो बहुत खराब हो जाती है या उसकी मौत हो जाती है। टीबी जैसे मामले में जांच रिपोर्ट आने में चार से छह हफ्ते लग जाते हैं, अब तीन चार घंटे में ही रिपोर्ट मिल जाएगी।

एक दिन में 500 से ज्यादा टेस्ट
लैब के साइंटिस्ट डा. नरोत्तम शर्मा ने बताया कि एक वक्त में सौ से ज्यादा टेस्ट प्रोसेस किए जा सकते हैं। उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर एक दिन में 500 से ज्यादा टेस्ट किए जा सकते हैं। महामारी या किसी क्षेत्र विशेष में बीमारी फैलने के समय तेजी से सैंपल जांच कर बीमारी नियंत्रित की जा सकती है।

इन बीमारियों की होगी जांच
लैब में स्वाइन फ्लू, टीबी, बर्ड फ्लू, रेबीज, हेपेटाइटिस बी व सी, एचआईवी, जेपनीज इनसेफलाइटिस (बच्चों का दिमागी बुखार), न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर, सर्वाइकल कैंसर, ब्लड कैंसर व लीवर कैंसर के मार्क्स, बिगड़ी टीवी (एमडीआर) और संक्रमण करने वाले वायरस की जांच की जा सकेगी।
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यह प्रदेश की पहली अत्याधुनिक, हाईटेक और सुरक्षित मोलिक्यूलर डायग्नोस्टिक लैब है। इसके खुलने के बाद प्रदेश के साथ ही हिमाचल और उत्तर प्रदेश के सैंपल की जांच भी आसानी से हो सकेगी। इससे मरीजों को खासा फायदा मिलेगा।
- भूपेंद्र रतूड़ी, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, महंत इंदिरेश अस्पताल
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