तीन साल तक 89 लोगों पर चला शोध -
यह शोध 2017 से 2019 तक 89 लोगों पर किया गया। इनमें 50 प्रतिशत मरीज ऐसे थे, जिन्हें पिछले दो दिनों के अंदर आंखों में समस्या हुई थी और 50 प्रतिशत मरीज ऐसे थे जिनमें आंखों की समस्या पुरानी थी। मरीजों की उम्र 20 से 50 साल थी।
- सबसे अधिक बाहरी हिस्से में सूजन मिली -
शोध के दौरान यह पाया गया कि 46 प्रतिशत मरीजों में आंख के आगे वाले हिस्से (एंटीरियर) में सूजन थी। 26 में आंख के बीच वाले हिस्से (इंटरमीडिएट) में सूजन और 15 प्रतिशत मरीजों में आंख के पीछे वाले हिस्से (पोस्टीरियर) में सूजन पाई गई। शोध में लिए गए मरीजों को पहले से ही आंखों में सूजन की समस्या थी। मरीज को एक बार दिखाने के बाद चार महीने से लेकर डेढ़ साल तक लगातार फॉलो किया गया।
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विशेषज्ञ के तौर पर एसजीपीजीआई और सैफई के डॉक्टर ने दिया सुझाव
एसजीपीजीआई लखनऊ और सैफई मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने शोध में एक विशेषज्ञ के तौर पर मदद की। जो जांच दून मेडिकल कॉलेज में नहीं हो सकती थी, उन्हें एसजीपीजीआई से करवाया गया। मरीज की फोटो देखकर डॉक्टरों ने अपना सुझाव दिया। शोध में अधिकतर मरीज दून मेडिकल कॉलेज के थे। यहां पर 40 फीसदी मरीज यूपी से आते हैं।