उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में बौद्घ भिक्षु अपनी दैवीय शक्ति से नींबू का स्वाद ही बदल दिया। पढ़ें, पूरी खबर...
खट्टे नींबू की बात जेहन में आते ही मुंह में पानी आ जाता है, लेकिन जानकर ताज्जुब होगा कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में धारचूला से 35 किमी दूर गर्गुवा के सौप गांव में 200 साल का इतिहास समेटे एक नींबू का पेड़ मीठे फल देता है।
नींबू के पेड़ की कहानी भी रोचक है। सौप गांव के बुजुर्गों के अनुसार करीब 200 साल पहले एक बौद्ध भिक्षु तिब्बत से घूमते हुए सौप गांव पहुंचे। भिक्षुक को गांव में दैवीय शक्ति का आभास हुआ, वह तीन महीने तक गांव में रहे।
भिक्षुक के गांव में रहने के दौरान गांव में खेती और पशुधन में बढ़ोत्तरी होने लगी। भिक्षुक में दैवीय शक्ति मानते हुए ग्रामीणों ने उससे स्थायी रूप से सौपगांव में ही रहने का अनुरोध किया। भिक्षुक गांव में रहने को तैयार हो गया, लेकिन उसने शर्त रखी कि वह मकान में नहीं रहेगा, गांव के लोग सहमत हो गए।