हरिद्वार में कुंभ क्षेत्र की विस्तार की मांग को लेकर अनशन पर बैठे मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने खुद को भी कमरे में बंद कर लिया है।
बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने जिला प्रशासन पर आत्मबोधानंद को दून अस्पताल में जनरल वार्ड में भर्ती करने और उन्हें पानी न देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब शासन प्रशासन की ओर से कुंभ क्षेत्र का विस्तार नहीं किया जाता। मातृसदन आवाज उठाता रहेगा।
स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि जिला प्रशासन की टीम 29 फरवरी की रात को 11 बजे कमरे का ताला तोड़कर ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को लेकर गई। जिला प्रशासन ने उचित उपचार दिलाने की बात कही थी, लेकिन देहरादून स्थित दून अस्पताल में आत्मबोधानंद को जनरल वार्ड में भर्ती किया था, जबकि ऐसे मामलों में स्पेशल इलाज देना होता है।
उन्होंने कहा कि आत्मबोधानंद को पीने के लिए नींबू पानी नहीं दिया गया जिससे आत्माबोधानंद पानी के लिए तरसते रहे। स्वयं को कमरे में बंद करने के सवाल पर स्वामी शिवानंद सरस्वती ने कहा कि अपनी बात रखने के लिए इससे ज्यादा शांतिपूर्ण वातावरण क्या हो सकता है।
आश्रम पहुंचे ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद
जिला प्रशासन की ओर से 29 फरवरी रात 11 बजे ब्रह्मचारी आत्माबोधानंद को दून अस्पताल में भर्ती किया। एक मार्च को दोपहर दो बजे उन्हें ऋषिकेश के एम्स हास्पिटल में भर्ती कराया गया, लेकिन स्वामी आत्मबोधानंद की किसी भी प्रकार के उपचार लेने से इनकार करने के बाद एम्स प्रशासन की ओर से उन्हें बुधवार को सवा बारह बजे डिस्चार्ज कर दिया गया। स्वामी आत्मबोधानंद शाम साढ़े तीन बजे मातृसदन में पहुंच गए।
कार्रवाई की निंदा की
कुंभ क्षेत्र के विस्तार के लिए तपस्या कर रहे ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद को जिला प्रशासन की ओर से रात्रि में अस्पताल में भर्ती करने की कार्रवाई की जन संघर्ष मोर्चा ने निंदा की। मोर्चा की ओर से काली पट्टी बांधकर विरोध किया। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष गुलशन खत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार को जनहित में मातृसदन की मांगें मान लेनी चाहिए।
मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल ठाकुर ने कहा कि यदि प्रदेश सरकार की ओर से जल्द ही मांगें नहीं मानी जाती है तो मोर्चा सड़कों पर उतरकर संघर्ष के लिए मजबूर होगा। मौके पर रवि कुमार, सन्नी रावत, गगन भंडारी, सुरेश कुमार, नीरज, मनोज कुमार आदि थे।