गंगा में हो रहे अवैध खनन को रोकने के लिए अन्न-जल त्याग चुके मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती की हालत नाजुक बनी हुई है।
शनिवार को कहा कि प्रदेश सरकार और शासन-प्रशासन मिलकर गंगा को बर्बाद करने पर तुले हैं। न्यायालयों के आदेश को भी नहीं माना जा रहा है। हरिद्वार में गंगा की इनती दुर्दशा पहले कभी नहीं हुई। अब गंगा की दुर्दशा देखी नहीं जाती। ऐसे में मेरे पास प्राण त्यागने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।
अवैध खनन के खिलाफ शिवानंद सरस्वती 21 मई से अनशन कर रहे हैं। 22 मई से उन्होंने जल का भी त्याग कर दिया है। भीषण गर्मी में बिना जल के दो दिन में उनकी हालत नाजुक हो गई है।
वहीं अवैध खनन कराने के आरोपी अधिकारी हरिद्वार के जिलाधिकारी हरिचंद्र सेमवाल और खनन निदेशक श्रीधर बाबू अद्दांकी के निलंबन की मांग को लेकर स्वामी शिवानंद के शिष्य ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद भी 16 मई से अनशन कर रहे हैं।
शनिवार की दोपहर पत्रकारों से वार्ता करते हुए स्वामी शिवानंद ने कहा कि उनके शिष्य स्वामी निगमानंद ने अवैध खनन के खिलाफ तप करते हुए प्राणों की बलि दे दी। अब हम गंगा को तहस-नहस होते नहीं देख सकते।
उन्होंने कहा कि प्रशासन गंगा से पोकलैंड और अन्य मशीनों को बाहर निकाले, उसके बाद ही कोई बात की जाएगी। इससे पहले कोई शर्त मंजूर नहीं है। शाम को एसडीएम बीर सिंह बुदियाल मातृसदन पहुंचे।
मातृसदन के संत ब्रह्मचारी दयानंद ने बताया कि एसडीएम के पास कोई एजेंडा नहीं था। उनसे पूछा गया कि क्या वह गंगा में खनन कर रही मशीनों को बाहर निकाल सकते हैं तो उनके पास कोई जवाब नहीं था। वहीं कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मातृसदन पहुंचकर स्वामी शिवानंद के आंदोलन को समर्थन किया।
मुख्यमंत्री और करीबियों पर साधा निशाना
स्वामी शिवानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके कई करीबियों पर निशाना साधा। स्वामी शिवानंद ने कहा कि अवैध खनन के कार्य में लगे लोगों से मुख्यमंत्री को अपने संबंध बताने चाहिए। उन्होंने कई लोगों के नाम गिनाते हुए अवैध खनन कराने के आरोप लगाए।
एंटी माइनिंग टीम पर भी उठाए सवाल
स्वामी शिवानंद ने एंटी माइनिंग टीम पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पहले गर्मजोशी दिखाने वाले टीम के सीईओ संजय गुंज्याल मातृसदन आकर उनके सवालों के जवाब दें। आखिर क्यों उन्हें अवैध खनन दिखाई नहीं दे रहा है। कुछ पट्टों पर करोड़ों रुपए जुर्माना लगाया गया पर अब उसको घटाकर लाखों में कर दिया गया है।