खिलाड़ियों को सम्मानित कर आचार्यों ने किया प्रेरित
समारोह को संबोधित करते हुए आचार्य विरक्तदेव ने कहा कि यदि व्यक्ति पूर्ण पुरुषार्थ करता है तो परिणाम अवश्य प्राप्त होता है। उन्होंने छात्रों को निरंतर परिश्रम और अनुशासन के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। संस्था के मुख्य अधिष्ठाता क्षेत्रपाल सिंह ने कहा कि खेलों से मनुष्य का समग्र विकास होता है। उन्होंने यह भी बताया कि पतंजलि के निर्देशन में संस्था खेल और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है। पंडित हेमंत तिवारी ने उल्लेख किया कि कबड्डी में गुरुकुल का प्रदर्शन हमेशा श्रेष्ठ रहा है। इस प्रतियोगिता में भी ब्रह्मचारियों ने अपनी उत्कृष्ट परंपरा कायम रखी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए स्वामी मित्रदेव ने कहा कि खेल अनुशासन का प्रतीक है और अनुशासन के माध्यम से ही खेलों में विजय प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने छात्रों से खेल के साथ शिक्षा में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने का आह्वान किया। इस अवसर पर स्वामी नारायणदेव, स्वामी वासुदेव, स्वामी प्रकाशदेव, स्वामी मुकुंददेव, स्वामी कौशलदेव और सुशील कुमार त्यागी सहित कई आचार्य उपस्थित रहे।
बैडमिंटन में आचार्यकुलम का दबदबा
बैडमिंटन प्रतियोगिता में आचार्यकुलम का दबदबा रहा। 14 वर्ष से कम, 17 वर्ष से कम और 19 वर्ष से कम श्रेणियों में आचार्यकुलम ने पहला स्थान हासिल किया। युगल बालक और युगल बालिका वर्ग में भी आचार्यकुलम ने कई श्रेणियों में जीत दर्ज की। समग्र अंकों के आधार पर आचार्यकुलम प्रथम रहा। गुरुकुल किशनगढ़ घासेड़ा और स्वामी दर्शनानंद हायर सेकेंडरी स्कूल भी प्रमुख स्थानों पर रहे।