परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने वेस्ट टू एनर्जी और कचरे से कंचन का संदेश देते हुये कहा कि प्लास्टिक अपशिष्ट से निपटने के लिये युवाओं को वेस्ट टू एनर्जी के सिद्धान्त के साथ आगे बढ़ना होगा।
प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन भारत में 1.54 मिलियन कचरा बीनने वालों की आय के लगभग आधे भाग का निर्माण करता है। प्लास्टिक का एक बड़ा हिस्सा ‘सिंगल-यूज’ या ‘थ्रोअवे प्लास्टिक पैकेजिंग’ का है इस पर रोक लगाना हम सभी नागरिकों का परम कर्तव्य है। कहा जल वैज्ञानिकों के अनुसार वर्तमान समय में जल की समस्या को देखें तो वर्ष 2030 तक पीने का पानी 50 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। भारत में अभी जितना जल है उससे आधा ही रह जाएगा यह अत्यंत चिंतन का विषय है। कहा प्लास्टिक कचरा सीवरों को अवरुद्ध करता है, समुद्री जीवन को खतरे में डालता है और लैंडफिल या प्राकृतिक वातावरण में रहने वाले सभी जीवों के स्वास्थ्य के लिये खतरा उत्पन्न करता है। हमें एकल उपयोग प्लास्टिक को बिल्कुल बंद करना होगा। क्योंकि नदियां और महासागर प्लास्टिक से भरते जा रहे है। जिसके कारण हर वर्ष एक लाख से अधिक जलीय जंतु मरते हैं। कहा हम सभी को अपनी सोच और अपने व्यवहार में परिवर्तन लाना होगा। अपनी गंगा, हमारी अन्य नदियों, अपने पर्यावरण और अपनी धरा को स्वच्छ बनाए रखने के लिए योगदान देना होगा। हम सभी संकल्प करें कि हम और हमारी आने वाली पीढ़ियों का जीवन प्लास्टिक विष से भरा हुआ न हो, बल्कि हमारा जीवन और हमारा पर्यावरण अमृत से भरा हुआ हो न की विष से।