-कैटरेक्ट के ऑपरेशन में इंफेक्शन होगा तो क्या दवा देंगे?
जवाब : एंटीबायोटिक्स का उपयोग सर्जरी में नहीं किया जाता है। संक्रमणहीन स्थिति में रोगी की सर्जरी की जाती है। विश्व में कहीं भी रोगी की सर्जरी की जाती है तो संक्रमणहीन स्थिति में होती है। आयुर्वेद से फिशूला व भंगदर का इलाज करते हैं। ये गुदा में होने वाली बीमारी है। घाव से मवाद निकलता है। क्षार सूत्र विधि से सर्जरी की जाती है। नीम, गिलोय शतपण समेत अन्य कई दवाईयां हैं, जो एंटीबायोटिक्स का काम करती है।
-एपेंडिक्स का ऑपरेशन होगा तो क्या दवा देंगे?
जवाब : आयुष चिकित्सा में एपेंडिक्स का इलाज भी है। इसमें रोगी का छह दिन का शल्य कर्म किया जाता है। एपेंडिक्स के इलाज में आरोग्य वर्धनी दवा का उपयोग किया जाता है। इसके साथ ही अन्य कई तरह की औषधि हैं।
-ईएनटी में साइनस का ऑपरेशन में क्या दवा देंगे?
जवाब : आयुर्वेद में ईएनटी को शाला तंत्र कहा जाता है। इसमें नाक, कान गला, दांत व आंख से संबंधित बीमारियों का इलाज होता है। साइनस का इलाज सिरोविरेचन की विधि से किया जाता है। तेलों को नाक में डाला जाता है व भाप दी जाती है। रक्त मोक्षण किया जाता है। 50-60 साल से ही आपरेशन हो रहे हैं। इससे पहले महाभारत जैसे बड़े-बड़े युद्ध हुए हैं। इन युद्धों में घायल सैनिकों का इलाज किया जाता था।
-सिजेरियन डिलीवरी के लिए एनेस्थिसिया की कौन सी दवा देंगे?
जवाब : सिजेरियन सामान्य रूप से प्रसव करने की विधि नहीं है। कोरोना काल में देश में 17 लाख प्रसव हुए हैं। इसमें 96 प्रतिशत सामान्य प्रसव से हुए हैं। लेकिन वर्तमान में हर किसी के सिजेरियन किए जा रहे हैं। सिजेरियन तभी किया जाता है, जब गर्भवती महिला की जान को खतरा या गर्भ में पल रहे बच्चे की गंभीर स्थिति है। आयुर्वेद चिकित्सा से सिजेरियन हो सकते हैं।